कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट
ADB in Bengal : राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और मुख्यमंत्री के सलाहकार सुब्रत गुप्ता ने राज्य सचिवालय नबान्न भवन में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में एडीबी ने पश्चिम बंगाल में औद्योगिक अवसंरचना विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें नीति आयोग द्वारा अनुशंसित ढांचे के अनुरूप सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है.
छह-बिंदुओं वाला एक रोडमैप प्रस्तुत
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले ही सूरत, वाराणसी, विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर के आसपास सीईआर परियोजनाओं के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किया है. अब एडीबी ने पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह का मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है और राज्य सरकार के सामने छह-बिंदुओं वाला एक रोडमैप प्रस्तुत किया है. नबान्न के सूत्रों ने बताया कि एडीबी ने कम से कम दो सीईआर विकसित करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि चार संभावित क्षेत्रों की पहचान भी की है.
कोलकाता के लिए प्रस्ताव
कोलकाता महानगरीय सीईआर को कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उलबेरिया और डानकुनी से जोड़ते हुए इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स के क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव दिया है. सिलीगुड़ी सीईआर को सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, अलीपुरदुआर और कूचबिहार से जोड़ने का प्रस्ताव पेश किया है, जो सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन तथा कृषि-प्रसंस्करण उद्योगों, विशेष रूप से साइट्रस और अनारस प्रसंस्करण पर केंद्रित होगा.
हल्दिया के लिए प्रस्ताव
इसी प्रकार, हल्दिया-दीघा सीईआर की परियोजना विशाखापत्तनम की तरह बंदरगाह-आधारित विकास मॉडल के रूप में की गयी है, जिसमें रिफाइनरियों, रासायनिक उद्योगों और पर्यटन का एकीकरण होगा, जबकि दुर्गापुर-आसनसोल सीईआर के अंतर्गत इस्पात, इंजीनियरिंग, भारी उद्योग और स्वच्छ विनिर्माण पर केंद्रित एक विनिर्माण केंद्र के रूप में कार्य करेगा.
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सिलीगुड़ी के लिए प्रस्ताव
एडीबी ने कोलकाता–डानकुनी–दुर्गापुर–आसनसोल मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर, हल्दिया–खड़गपुर औद्योगिक कॉरिडोर, सिलीगुड़ी–जलपाईगुड़ी एग्रो-प्रोसेसिंग कॉरिडोर और पूरे राज्य में लॉजिस्टिक्स हब नेटवर्क सहित औद्योगिक गलियारों को समर्थन देने में भी रुचि व्यक्त की है. बैठक में वाराणसी मॉडल पर आधारित चार पर्यटन क्लस्टरों की भी संभावनाओं पर विचार किया गया, जिसमें दार्जिलिंग–डुआर्स–कालिम्पोंग–तीस्ता सर्किट, दीघा–मंदारमणि–ताजपुर तटीय सर्किट, सुंदरवन इको-टूरिज्म क्लस्टर और कोलकाता–मुर्शिदाबाद–बिष्णुपुर हेरिटेज सर्किट शामिल है.
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