Thursday, July 2, 2026

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पहली बार झंझारपुर कोर्ट से दोषी को फांसी की सजा:2023 में मां-प्रेमी ने बेटे-बेटी की हत्या की थी; कोर्ट ने रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस माना


साल 2023 में मधुबनी जिले के झंझारपुर में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने 4 वर्षीय बेटे प्रिंस कुमार और डेढ़ वर्षीय बेटी सृष्टि कुमारी की हत्या कर दी थी। अब, घटना के करीब तीन साल बाद झंझारपुर सिविल कोर्ट ने महिला और उसके प्रेमी को फांसी की सजा सुनाई है। झंझारपुर कोर्ट के इतिहास में यह पहला मामला है, जिसमें इस दोहरे हत्याकांड को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ श्रेणी का मानते हुए दोषी मां अनीता कुमारी और उसके प्रेमी जय प्रकाश मंडल को मृत्युदंड सुनाया गया है। इसके साथ ही जिला जज-2 अभिषेक रंजन ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता की धारा 201/34 (साक्ष्य मिटाने) के तहत दोनों को सात-सात साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। प्रेम संबंध में बाधा बनने पर बच्चों की हत्या अभियोजन पक्ष के अनुसार, नरही गांव (अंधरामठ थाना क्षेत्र) निवासी प्रमोद कुमार साफी की पत्नी अनिता कुमारी ने अपने प्रेमी जय प्रकाश मंडल के साथ मिलकर प्रेम संबंध में बाधा बन रहे अपने चार वर्षीय पुत्र प्रिंस कुमार और डेढ़ वर्षीय पुत्री सृष्टि कुमारी की हत्या कर दी थी। सात दिन बाद हुआ था मामले का खुलासा मामले के अनुसार, 3 जुलाई 2023 को अनिता कुमारी दोनों बच्चों को लेकर घर से निकली थीं। देर शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। करीब सात दिन बाद खुलासा हुआ कि दोनों बच्चों की हत्या कर उनके शव बलान नदी के खाप पुल से नदी में फेंक दिए गए थे। चार वर्षीय प्रिंस का शव बरामद कर लिया गया था, जबकि सृष्टि का शव तेज धारा में बह गया था। घटना के बाद ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। दोनों 11 जुलाई 2023 से न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने बताया जघन्य और अमानवीय अपराध सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक देव शंकर झा ने इसे समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला अपराध बताते हुए मृत्युदंड की मांग की। अदालत ने गवाहों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया। फैसले में अदालत ने टिप्पणी की कि यह अपराध अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला है।

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