Friday, June 26, 2026

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पाकुड़ के चापा गांव में पेयजल संकट गहराया:ग्रामीण झरने से लाते हैं पानी, यहीं से जानवर भी बुझाते हैं प्यास; स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं


पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड की कर्माटांड़ पंचायत के चापा गांव में स्वच्छ पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। लगभग 200 आदिम जनजाति आबादी वाला यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां के निवासियों को पीने के पानी के लिए डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित एक झरने पर निर्भर रहना पड़ता है। यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि ग्रामीण जिस झरने का पानी इस्तेमाल करते हैं, उसी स्रोत से जानवर भी पानी पीते हैं। गांव के तीनों टोलों में स्वच्छ पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। पानी पूरी तरह से सुरक्षित और शुद्ध नहीं
इस कारण महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनके दैनिक कार्य और आजीविका भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि झरने का पानी पूरी तरह से सुरक्षित और शुद्ध नहीं है। फिर भी मजबूरी में उन्हें यही पानी पीना पड़ रहा है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों ने सरकार के विकास संबंधी दावों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और विकास की योजनाएं धरातल पर नहीं दिखतीं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस समस्या पर पूरी तरह से मौन हैं। रमेश पहाड़िया, छोटा मैसा पहाड़िया, अर्जुन पहाड़िया, सजनी पहाड़ीन, देवी पहाड़ीन, सुरजी पहाड़ीन, डोंबा पहाड़िया (प्रधान) और गोली पहाड़ीन सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से गांव में जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। सोलर आधारित वाटर पंप लगाया जाएगा: उपविकास आयुक्त
इधर, पाकुड़ के उपविकास आयुक्त अरविंद कुमार लाल ने बताया कि लिट्टीपाड़ा के पहाड़ी क्षेत्र में बोरिंग वाहन नहीं पहुंच पाता है। इस कारण काफी समस्याएं सामने आ रही है। फिलहाल जिला प्रशासन झरने के पानी को संरक्षित कर उसे ग्रामीण क्षेत्र के टोला में पहुंचने के लिए सोलर आधारित वाटर पंप अधिष्ठापित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी टोला का सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही सर्वे रिपोर्ट आ जाएगी और इसके बाद पीएचडी विभाग द्वारा इसको लेकर डीपीआर बनाकर दिया जाएगा और उसके बाद आगे इसका क्रियान्वयन करवाया जाएगा।

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