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पाकुड़ जिलेभर में रविवार रात शरद पूर्णिमा के अवसर पर लक्खी पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस दौरान विभिन्न पूजा पंडालों और मंदिरों में मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। बंगाली पुरोहितों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न कराई। आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर का महाप्रसाद वितरित किया गया। मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा स्थलों पर पहुंचे। कई महिलाओं ने व्रत रखा और घरों में विशेष पकवान बनाए। जिला मुख्यालय के सिंह वाहिनी मंदिर, सरस्वती पुस्तकालय दुर्गा पूजा पंडाल, तांतीपाड़ा, राजापाड़ा, कालिकापुर और रेलवे कॉलोनी में भी धूमधाम से लक्खी पूजा का आयोजन किया गया। लोगों ने अपने-अपने घरों में भी मां लक्ष्मी की पूजा की। जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी पूजा को लेकर उत्साह देखने को मिला। शाम से ही पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। पूजा-अर्चना और आरती के दौरान माहौल भक्तिमय बना रहा। चंद्रमा की रोशनी में रखी गई खीर, सुबह किया गया सेवन पंडित भुवनेश्वर ओझा ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर लक्खी पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर आती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, कमला पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। लक्खी पूजा बंगाली समुदाय की पुरानी परंपरा है। अब अन्य हिंदू समुदायों के लोग भी इसे श्रद्धा के साथ मनाते हैं। शरद पूर्णिमा की रात घरों में खीर बनाई गई। इसे चंद्रमा की रोशनी में खुले आसमान के नीचे रखा गया। सोमवार सुबह लोगों ने खीर का सेवन किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। चांदनी में रखी खीर अमृत के समान हो जाती है। सुबह इसके सेवन से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इसी मान्यता के चलते लोगों ने परंपरा के अनुसार खीर तैयार की और पूजा के बाद उसका सेवन किया। कई परिवारों में रातभर खीर को चांदनी में रखा गया। हिरणपुर और अमड़ापाड़ा में आज लगेगा मेला लक्खी पूजा के अवसर पर जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इस दौरान आरएसएस की ओर से शरद पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। इसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया। उत्सव के दौरान शरद पूर्णिमा के धार्मिक महत्व और परंपराओं को लेकर उत्साह देखने को मिला। वहीं, सोमवार को हिरणपुर प्रखंड के लोटस टेंपल और अमड़ापाड़ा में लक्खी पूजा के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ विदेशी भक्तों के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। पूजा और मेले के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। जिले में शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों, पूजा पंडालों और घरों में हुई पूजा-अर्चना से भक्तिमय माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
पाकुड़ जिला में लक्खी पूजा मनाई गई:शरद पूर्णिमा पर बंगाली पुरोहितों ने की पूजा, भक्तों को बांटा खीर का प्रसाद
