पाकुड़ जिले के मालपहाड़ी थाना क्षेत्र के कान्हपुर में अवैध पत्थर उत्खनन की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। यह मामला झारखंड और पश्चिम बंगाल की अंतरराज्यीय सीमा से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और खदान क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए मापी का कार्य शुरू कराया। इस दौरान सीमा की सटीक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रोन कैमरे का उपयोग किया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि आगे की कार्रवाई तथ्यों के आधार पर की जा सके। ड्रोन और सर्वेयर टीम की मदद से हो रहा सीमा निर्धारण मापी कार्य के दौरान एसडीओ साइमन मरांडी, जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार और सीओ अरविंद कुमार बेदिया सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सर्वेयर टीम ने ड्रोन कैमरे की सहायता से झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा का निर्धारण करने की प्रक्रिया शुरू की, वहीं स्थानीय अमीन ने जमीनी स्तर पर सीमा चिन्हित करने का कार्य किया। अधिकारियों के अनुसार, पूर्व में भी इस मामले की जांच की गई थी, लेकिन अंतरराज्यीय सीमा विवाद के कारण ठोस कार्रवाई में बाधा आ रही थी। इस बार तकनीकी रूप से सटीक मापी कराकर विवाद को स्पष्ट करने की दिशा में कदम उठाया गया है। मापी के दौरान मालपहाड़ी ओपी थाना की पुलिस टीम भी सुरक्षा के मद्देनजर मौजूद रही। रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में की जा रही मापी केवल सीमा निर्धारण के उद्देश्य से है। इसके पूरा होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कथित अवैध खनन झारखंड की सीमा के भीतर हुआ है या नहीं। जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रूप से पत्थर उत्खनन और परिवहन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध खनन पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
पाकुड़-बंगाल सीमा पर प्रशासन ने उड़ाया ड्रोन:अवैध पत्थर खनन माफियाओं में मचा हड़कंप, रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होना तय
पाकुड़ जिले के मालपहाड़ी थाना क्षेत्र के कान्हपुर में अवैध पत्थर उत्खनन की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। यह मामला झारखंड और पश्चिम बंगाल की अंतरराज्यीय सीमा से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और खदान क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए मापी का कार्य शुरू कराया। इस दौरान सीमा की सटीक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रोन कैमरे का उपयोग किया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि आगे की कार्रवाई तथ्यों के आधार पर की जा सके। ड्रोन और सर्वेयर टीम की मदद से हो रहा सीमा निर्धारण मापी कार्य के दौरान एसडीओ साइमन मरांडी, जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार और सीओ अरविंद कुमार बेदिया सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सर्वेयर टीम ने ड्रोन कैमरे की सहायता से झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा का निर्धारण करने की प्रक्रिया शुरू की, वहीं स्थानीय अमीन ने जमीनी स्तर पर सीमा चिन्हित करने का कार्य किया। अधिकारियों के अनुसार, पूर्व में भी इस मामले की जांच की गई थी, लेकिन अंतरराज्यीय सीमा विवाद के कारण ठोस कार्रवाई में बाधा आ रही थी। इस बार तकनीकी रूप से सटीक मापी कराकर विवाद को स्पष्ट करने की दिशा में कदम उठाया गया है। मापी के दौरान मालपहाड़ी ओपी थाना की पुलिस टीम भी सुरक्षा के मद्देनजर मौजूद रही। रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में की जा रही मापी केवल सीमा निर्धारण के उद्देश्य से है। इसके पूरा होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कथित अवैध खनन झारखंड की सीमा के भीतर हुआ है या नहीं। जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रूप से पत्थर उत्खनन और परिवहन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध खनन पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

