Sunday, May 10, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

पुटकी-महुदा ट्रांसमिशन लाइन योजना को फॉरेस्ट क्लीयरेंस

पुटकी-महुदा ट्रांसमिशन लाइन योजना को फॉरेस्ट क्लीयरेंस

Dhanbad News: विक्की प्रसाद, धनबाद. धनबाद जिले की बिजली व्यवस्था को मजबूत करनेवाली पुटकी-महुदा ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को आखिरकार पांच साल बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिल गया है. मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना के कार्य में तेजी आने की उम्मीद है. योजना पूरी होने पर जिले में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद होगी. इस परियोजना के तहत पुटकी के जैतुडीह और महुदा के राधानगर में बने ग्रिड सबस्टेशनों को ट्रांसमिशन लाइन से जोड़ा जायेगा. पुटकी के रास्ते धनबाद तक बिजली आपूर्ति की जायेगी. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे मौजूदा बिजली नेटवर्क पर दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति हो सकेगी.

साल के अंत तक बलियापुर व निरसा ग्रिड होंगे चार्ज :

ट्रांसमिशन विभाग बलियापुर व निरसा में नये ग्रिड का निर्माण करा रहा है. इस ग्रिड सबस्टेशन को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है. साल के अंत तक इन ग्रिडों को चार्ज करने का लक्ष्य है. इसके बाद इन इलाकों में बिजली आपूर्ति की स्थिति काफी बेहतर हो जायेगी. नये ग्रिड चालू होने पर स्थानीय स्तर पर लोड का वितरण आसान होगा. इससे लाइन लॉस कम होगा.

अदाणी केटीपीएस और तेनुघाट प्लांट से जोड़ने की तैयारी :

विभाग दोनों ग्रिड सबस्टेशन को अदाणी केटीपीएस और तेनुघाट पावर प्लांट से जोड़ने की योजना पर भी काम कर रहा है. इसका उद्देश्य धनबाद को अलग-अलग स्रोतों से जोड़ना है. यदि किसी एक स्रोत में तकनीकी खराबी आती है तो दूसरे स्रोत से बिजली आपूर्ति जारी रहेगी.

शहर से गांव तक दिखेगा बदलाव का असर :

नयी ट्रांसमिशन लाइन का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा. ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में भी बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा. नयी व्यवस्था के लागू होने से लो वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या से भी निजात मिलेगी. बिजली आपूर्ति बेहतर होने से छोटे उद्योगों व व्यवसायों को भी फायदा होगा.

एक्सप्लेनर : बढ़ती मांग के अनुरूप तैयार हो रहा नेटवर्क

जिले में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. मौसम व औद्योगिक गतिविधियों के अनुसार औसतन प्रतिदिन 350 से 450 मेगावाट तक बिजली की आवश्यकता होती है. वर्तमान में मुख्य रूप से डीवीसी के माध्यम से बिजली आपूर्ति हो रही है. डीवीसी से लगभग 210 से 230 मेगावाट बिजली मिलती है. जबकि गोविंदपुर ग्रिड से करीब 40 से 50 मेगावाट बिजली मिलती है. मांग व आपूर्ति में अंतर के कारण कई बार उपभोक्ताओं को बिजली कटौती, लो वोल्टेज और तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में नये ट्रांसमिशन नेटवर्क को भविष्य की जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा रहा है.

ट्रांसमिशन विभाग के वरीय प्रबंधक ज्ञान रंजन से बातचीत

सवाल : पुटकी-महुदा ट्रांसमिशन लाइन योजना को फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने का कितना महत्व है?

यह योजना लंबे समय से प्रक्रिया में अटकी थी. फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने के बाद अब काम में तेजी आयेगी. यह लाइन धनबाद की बिजली व्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इसके माध्यम से नये ग्रिडों से बिजली आपूर्ति शुरू हो सकेगी. पूरे सिस्टम को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी.

सवाल : आम उपभोक्ताओं को इससे क्या फायदा होगा?

सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर व भरोसेमंद होगी. नये नेटवर्क के जरिए कई स्रोतों से बिजली मिलेगी, जिससे कटौती कम होगी और वोल्टेज की समस्या भी सुधरेगी. ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर ढंग से बिजली आपूर्ति होगी.

सवाल : आने वाले समय में विभाग की क्या प्राथमिकता होगी?

विभाग का फोकस धनबाद को मजबूत मल्टीसोर्स पावर नेटवर्क से जोड़ने पर है. बलियापुर व निरसा ग्रिड को इस वर्ष के अंत तक चालू करने का लक्ष्य है. वहीं अदाणी और तेनुघाट जैसे अतिरिक्त स्रोतों से कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है, ताकि भविष्य की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके.

यह भी जानें

-धनबाद को प्रतिदिन 350-450 मेगावाट बिजली की जरूरत-डीवीसी से मिलती है 210-230 मेगावाट बिजली-गोविंदपुर ग्रिड से 40-50 मेगावाट सप्लाईउपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा-निर्बाध और स्थिर बिजली आपूर्ति-कटौती में कमी, बेहतर वोल्टेज सपोर्ट-भविष्य की मांग के अनुसार मजबूत पावर सिस्टम

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles