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‘मुजफ्फरपुर के प्रथम मेयर की हत्या हो गई और पुलिस को 8 साल में सबूत नहीं मिले। पुलिस और सरकार मिली हुई है। आरोपियों के खिलाफ कोई एविडेंस नहीं मिले इसलिए सरकार ने एसएसपी हरप्रित कॉर का तबादला कर दिया था, ताकि आसानी से आरोपियों को बरी करते जाए। पुलिस आज तक सिर्फ बातें बनाती रही।’ मैं अब चाहती हूं कि मामले की जांच सीबीआई से हो। हाईकोर्ट भी जाऊंगी।’ ये बातें पूर्व मेयर समीर कुमार की पत्नी वर्षा रानी ने कही हैं। वहीं, बेटे तुषार ने कहा है कि, ‘पुलिस ने मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तक अदालत में नहीं दी।’ समीर-उनके ड्राइवर रोहित कुमार डबल मर्डर केस में जिला एवं सत्र न्यायालय 6 आरोपियों को बरी किया है, जिसके बाद पूर्व मेयर के परिवार में नाराजगी है, पत्नी और बेटे ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट… पूर्व मेयर के घर से तस्वीरें… ‘पुलिस कहती थी एक-एक अपराधी को सजा होगी’ पूर्व मेयर की पत्नी वर्षा रानी ने कहा कि हत्या का सीसीटीवी आया। मर्डर कैसे हुआ, कैमरे में देखा गया। ये दुर्भाग्य है कि पुलिस सिर्फ इतने साल तक जांच ही करती रही और कोई साक्ष्य नहीं मिले। इसका मतलब है कि जांच ही नहीं हुई। पुलिस पहले कहती थी हम आपके साथ हैं। एक-एक अपराधी पकड़ा जाएगा। सभी को सजा होगी, हम लोग कार्रवाई में लगे हैं। अब पता चला किस तरह की कार्रवाई हो रही थी। हमें मोबाइल भी नहीं दिया – पत्नी वर्षा कहती हैं कि पुलिस ने समीर का मोबाइल एक साल तक रख लिया था। कहते थे कि जांच हो रही है। हमें मोबाइल तक नहीं दिया। अगर दिया होता तो हमलोग भी देखते लास्ट कॉल किसका आया है। आखिरी मैसेज किसने और क्या किया है। इस आधार पर हमलोग भी तो कुछ बोलते। पुलिस हमें मुर्ख बनाती रही- बेटा मृतक के बेटे तुषार भारद्वाज ने कहा कि शहर के बीच AK-47 से फायरिंग हुई। डबल मर्डर हुआ। ये सब सीसीटीवी में भी कैद हुआ। जिसके बाद साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों का बरी हो जाना बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं। ऐसा लग रहा है कि पुलिस और सरकार मिलकर हमें मुर्ख बना रही थी। ‘पुलिस को जवाब देना होगा’ तुषार कहते हैं कि हमने पुलिस से पूछा था कि पिता के मोबाइल पर लास्ट कॉल किसका है। क्या किसी ने मैसेज किया था, पर हमें पुलिस ने कुछ नहीं बताया। हमने पुलिस से मोबाइल भी मांगा था, तब पुलिस ने कहा था हम मोबाइल नहीं दे सकते हैं। हमारे ऊपर दबाल है। अब पता चल रहा है कि किसका दबाव था। पुलिस किसके साथ मिलकर काम रही है। हमलोगों ने फैसला कर लिया है कि हाईकोर्ट जाएंगे। पुलिस को जबाव देना होगा। लोक अभियोजक बोले- जांच में गंभीर कमियां रहीं लोक अभियोजन पदाधिकारी अजय कुमार ने भी फैसले के बाद कहा कि अनुसंधान में कई गंभीर कमियां रह गईं। पूर्व मेयर का जब्त मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। यदि कॉल डिटेल और मोबाइल डेटा का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जाता तो महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते थे। कई प्रत्यक्षदर्शी अदालत में खुलकर गवाही नहीं दे सके। इन कारणों का लाभ आरोपियों को मिला और अदालत ने छह आरोपियों को बरी कर दिया। 23 सितंबर 2018 को AK-47 से की गई थी दोहरी हत्या यह बहुचर्चित हत्याकांड 23 सितंबर 2018 की शाम नगर थाना क्षेत्र के नवाब रोड-चंदवारा (लकड़ीढाई इलाके) में हुआ था। पूर्व मेयर समीर कुमार अपनी कार से जा रहे थे, तभी अपराधियों ने एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग कर उनकी और चालक रोहित कुमार की हत्या कर दी थी। नगर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष मो. शुजाउद्दीन के बयान पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस की लंबी जांच के बाद इस मामले में कुल 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। जांच के दौरान सामने आया कि कल्याणी मछली मंडी की जमीन पर कब्जे के विवाद और प्रॉपर्टी डीलिंग को लेकर इस दोहरे हत्याकांड की साजिश रची गई थी। जांच में कई चरणों में दाखिल हुई चार्जशीट जांच अधिकारी धीरज कुमार ने 15 जनवरी 2019 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 12 मार्च 2019 को जांच अधिकारी बानेश्वर किश्कू ने पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की। बाद में तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की गई, जिसके आधार पर दूसरे सेशन ट्रायल की सुनवाई शुरू हुई। पुलिस जांच में इस दोहरे हत्याकांड में कुल 11 आरोपियों की संलिप्तता सामने आई। इनमें से दो आरोपी गोविंद शर्मा और आशुतोष शाही की अलग-अलग घटनाओं में हत्या हो चुकी है। शूटर गोविंद की गैंगवार में गोली मारकर हत्या पूर्व मेयर समीर कुमार और आशुतोष शाही हत्याकांड सहित कई मामलों में गोविंद शर्मा आरोपी था। 31 मई 2026 की रात शूटर गोविंद की गैंगवार में गोली मारकर हत्या कर दी गई। शहर के अमर सिनेमा रोड स्थित आइकॉन टावर अपार्टमेंट के बेसमेंट में अपराधियों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

