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औरंगाबाद में जिला योजना भवन स्थित सभागार में अनुमंडल स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा के निर्देशानुसार आयोजित बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी गौरव सिंह ने की। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, पूजा समितियों और शांति समिति के सदस्यों को पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि पर्व के दौरान सभी संबंधित पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सतर्कता बरतें और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने शांति समिति के सदस्यों से अपने क्षेत्रों में शांति दूत के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। स्थानीय स्तर पर किसी भी समस्या या विवाद की स्थिति में आपसी समन्वय से उसका त्वरित समाधान करने पर जोर दिया गया। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं, आपत्तिजनक सामग्री और भड़काऊ संदेशों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को देने को कहा गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पूजा पंडालों में सीसीटीवी, बैरिकेडिंग और 20 स्वयंसेवक रहेंगे तैनात पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। सभी पूजा समितियों को पंडालों में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे और जन उद्घोषणा प्रणाली (पीए सिस्टम) लगाने को कहा गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग द्वार बनाने, मजबूत बैरिकेडिंग करने तथा भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। प्रत्येक पूजा पंडाल में 20 प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती अनिवार्य की गई है। अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पंडालों में अग्निशामक यंत्र, पर्याप्त पानी और बालू से भरी बाल्टियां उपलब्ध रखने को कहा गया। विद्युत व्यवस्था में केवल सुरक्षित एवं इंसुलेटेड तारों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया। संबंधित अधिकारियों को पूजा पंडालों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया। ध्वनि प्रदूषण और शांति व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। बैठक में डीजे के उपयोग पर प्रतिबंध का पालन कराने तथा अश्लील, भड़काऊ या धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले गानों के प्रसारण पर रोक सुनिश्चित करने को कहा गया। प्रतिबंधित हथियारों और अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर भी रोक रहेगी। ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा। अधिकारियों को उच्च न्यायालय और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सुरक्षित घाटों पर ही होगा प्रतिमा विसर्जन, रात 10 बजे के बाद जुलूस पर रोक प्रतिमा विसर्जन को लेकर अनुमंडल पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि खतरनाक घाटों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं। प्रतिमाओं का विसर्जन केवल पूर्व निर्धारित सुरक्षित घाटों पर ही कराया जाएगा। विसर्जन जुलूस निर्धारित समय-सीमा के भीतर और दिन के समय संपन्न कराने का निर्देश दिया गया। रात 10 बजे के बाद विसर्जन जुलूस की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति और आवश्यक लाइसेंस प्राप्त किए बिना पूजा पंडाल का निर्माण या जुलूस का संचालन नहीं किया जाए। दुर्गा पूजा का आयोजन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इस दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और विधि-व्यवस्था से जुड़ी तैयारियां समय पर पूरी करने को कहा गया। बैठक के अंत में एसडीओ गौरव सिंह ने आम नागरिकों, पूजा समितियों और शांति समिति के सदस्यों से आपसी भाईचारे एवं सामाजिक सौहार्द के साथ पर्व मनाने की अपील की। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना प्रशासन को देने का आग्रह किया। मीटिंग में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-1 सुशील कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-2 आदित्य कुमार, यातायात पुलिस उपाधीक्षक अविनाश कुमार, अनुमंडल क्षेत्र के सभी अंचलाधिकारी, थानाध्यक्ष, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और शांति समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
पूजा पंडालों में 20 ट्रेंड स्वयंसेवकों की तैनाती अनिवार्य:दुर्गा पूजा और दशहरा को लेकर शांति समिति की बैठक; रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाने पर रोक
