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पूर्णिया में कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। साथ ही बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए दो जिलाध्यक्ष बनाए हैं। शहरी इलाके की जिम्मेदारी कुमार आदित्य को दी गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की कमान अफरोज आलम को सौंपी गई है। इस फैसले के साथ ही जिले की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। अफरोज आलम सांसद पप्पू यादव के करीबी माने जाते हैं। जबकि कुमार आदित्य के आनंद मोहन समेत कांग्रेस के कई बड़े लीडरों से गहरे संबंध हैं।
कांग्रेस का ये कदम सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है। पार्टी अब शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग फोकस के साथ काम करेगी। पूर्णिया शहरी के जिलाध्यक्ष बनाए गए 51 साल के कुमार आदित्य का अब तक का राजनीतिक सफर बेदाग रहा है। वे राजपूत जाति से आते हैं। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। छात्र जीवन से ही उन्होंने राजनीति की शुरुआत की और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राम सुंदर दास के सानिध्य में राजनीतिक अनुभव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व में समता पार्टी में काम किया। युवा समता के राज्य सचिव और राज्य परिषद सदस्य जैसे अहम पद संभाले। बाद में रामविलास पासवान के साथ लोक जनशक्ति पार्टी में गए, जहां 2003 से 2005 तक पूर्णिया जिलाध्यक्ष रहे। पत्नी भी मुखिया हैं इस पूरे फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा अफरोज आलम की हो रही है। सांसद पप्पू यादव के करीबी माने जाते हैं। अफरोज आलम सत्कोदरिया पंचायत के मुखिया हैं और उनकी पहचान एक मजबूत जमीनी नेता के रूप में है। उनके साथ ही परिवार की पकड़ पंचायत स्तर पर काफी मजबूत है। वे और पत्नी दोनों मुखिया हैं। के.नगर प्रखंड और चंपानगर इलाके में अफरोज आलम की पकड़ बेहद गहरी मानी जाती है। ग्रामीण वोटरों के बीच उनकी सीधी पहुंच और लगातार सक्रियता ने उन्हें एक भरोसेमंद जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया है। पंचायत से आगे बढ़कर उन्होंने पूरे इलाके में एक मजबूत जनाधार तैयार किया है। कांग्रेस ने गांव-देहात में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक ऐसे चेहरे पर दांव खेला है, जिसकी पकड़ सीधे जनता पर है। गांव-देहात में जमीनी पकड़ वाले नेता पर भरोसा इस फैसले से पार्टी बूथ स्तर तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है। आम जनता की समस्या को उठाएंगे कुमार आदित्य ने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। मेरा लक्ष्य है कि कांग्रेस को शहरी क्षेत्र में मजबूत किया जाए और हर वर्ग की आवाज पार्टी तक पहुंचे। वहीं, अफरोज आलम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस को और मजबूत करना मेरी प्राथमिकता होगी। गांव-गांव तक संगठन को पहुंचाकर लोगों की समस्याओं को उठाया जाएगा।


