पूर्णिया जिले के बड़हरा कोठी थाना क्षेत्र के सुखसेना गांव में सर्पदंश से एक 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर डॉक्टरी इलाज न मिलने और झाड़-फूंक के कारण बच्चे की जान गई। मृतक की पहचान धर्मेंद्र कुमार के 12 वर्षीय पुत्र बम बम कुमार के रूप में हुई है। वह चार बहनों का इकलौता और सबसे छोटा भाई था। मृतक के ग्रामीण आदित्य कुमार ने बताया कि बच्चे को रविवार दोपहर घर में ही धामन सांप ने काट लिया था। सांप काटने के बाद परिजनों ने तत्काल डॉक्टर के पास जाने के बजाय गांव के एक तथाकथित वैद्य से झाड़-फूंक कराना शुरू कर दिया। झाड़-फूंक के दौरान बच्चे की हालत और बिगड़ गई। जब वहां इलाज संभव नहीं हो पाया, तो परिजन उसे पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) ले गए। जीएमसीएच में डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मृतक बम बम के दादा रामचंद्र यादव ने भी घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पोते को रविवार दोपहर घर में ही धामन सांप ने काटा था, जिसके बाद वे गांव के वैद्य के पास झाड़-फूंक के लिए गए थे, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।
पूर्णिया में सर्पदंश से बच्चे की मौत:झाड़-फूंक में फंसने से अस्पताल पहुंचने में हुई देर, डॉक्टर ने मृत घोषित किया
पूर्णिया जिले के बड़हरा कोठी थाना क्षेत्र के सुखसेना गांव में सर्पदंश से एक 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर डॉक्टरी इलाज न मिलने और झाड़-फूंक के कारण बच्चे की जान गई। मृतक की पहचान धर्मेंद्र कुमार के 12 वर्षीय पुत्र बम बम कुमार के रूप में हुई है। वह चार बहनों का इकलौता और सबसे छोटा भाई था। मृतक के ग्रामीण आदित्य कुमार ने बताया कि बच्चे को रविवार दोपहर घर में ही धामन सांप ने काट लिया था। सांप काटने के बाद परिजनों ने तत्काल डॉक्टर के पास जाने के बजाय गांव के एक तथाकथित वैद्य से झाड़-फूंक कराना शुरू कर दिया। झाड़-फूंक के दौरान बच्चे की हालत और बिगड़ गई। जब वहां इलाज संभव नहीं हो पाया, तो परिजन उसे पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) ले गए। जीएमसीएच में डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मृतक बम बम के दादा रामचंद्र यादव ने भी घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पोते को रविवार दोपहर घर में ही धामन सांप ने काटा था, जिसके बाद वे गांव के वैद्य के पास झाड़-फूंक के लिए गए थे, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।
