![]()
धनबाद के बहुचर्चित रिंग रोड भू-अर्जन घोटाले में एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने सोमवार को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी। यह कार्रवाई गिरफ्तार किए गए 17 नामजद और अन्य आरोपियों के खिलाफ की गई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी पद का दुरुपयोग कर बिचौलियों के साथ मिलकर दलितों और आदिवासियों की जमीन के मुआवजे की राशि का गबन किया। जांच में सामने आया कि तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी, कानूनगो और अमीन ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी दस्तावेजों (डीड) के आधार पर मुआवजे का भुगतान कर दिया। हैरानी की बात यह है कि असली रैयतों (जमीन मालिकों) को पता तक नहीं चला और कागजों पर जमीन किसी और के नाम दिखाकर पैसे निकाल लिए गए। चार्जशीट में तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, तत्कालीन सीओ (वर्तमान में जेपीएससी परीक्षा नियंत्रक) विशाल कुमार, पैक्स चेयरमैन रामकृपाल गोस्वामी और काली प्रसाद सिंह सहित अन्य शामिल हैं। एसीबी ने 9 जनवरी को रांची, बोकारो और देवघर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी कर इन आरोपियों को जेल भेजा था। घोटाला 2015 में सामने आया था। यह बलियापुर बाईपास से धनसार चौक तक बनने वाले रिंग रोड को लेकर था। 2016 में एसीबी ने मामले में केस दर्ज किया। जांच एजेंसी को भू-अर्जन में सरकारी नियमों की अनदेखी का पता चला था। यह भी पता चला कि बगैर शिविर लगाए दलितों-आदिवासियों की जमीन फर्जी रैयतों के नाम कर दी। फर्जी डीड पर मुआवजे का भुगतान कर दिया। जहां की जमीन अधिगृहित होनी थी, उनकी सूचना दलालों से साझा की। दलालों ने रैयतों से औने-पौने भाव में उन जमीनों को खरीदकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था। आरोपियों ने दुहाटांड़, धनबाद, धोखरा और दुहाटांड़ मौजा में फर्जी डीड के आधार पर मुआवजा ले लिया था। जबकि जमीन अभी भी रैयतों के पास है।


