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झारखंड में आज से मौसम का मिजाज बदलने के संकेत मिल रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना के चलते राज्य के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवा और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग के अनुसार दो और तीन जुलाई को लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवा चलने की संभावना है। चार जुलाई तक यह स्थिति बनी रह सकती है, जबकि पांच और छह जुलाई को रांची सहित कई जिलों में फिर से भारी वर्षा के आसार हैं। लगातार बारिश से अधिकतम तापमान में गिरावट आएगी लेकिन बीच-बीच में उमस बढ़ने की भी संभावना बनी रहेगी। जुलाई में सामान्य से कम बारिश के आसार मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे जुलाई माह में सामान्य या सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। महीने के पहले 10 दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद है, क्योंकि मानसून इस दौरान सक्रिय रहेगा। लेकिन इसके बाद वर्षा की गतिविधियों में कमी आ सकती है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति है। जो मानसून की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि राज्य में मानसून पूरी तरह फैलने के बावजूद सभी जिलों में समान रूप से बारिश नहीं हो रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेती के लिए लगातार और संतुलित बारिश बेहद जरूरी होती है। 10 साल में तीन बार ही जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 10 वर्षों में जुलाई महीने में केवल तीन बार सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। साल 2017 में 81 प्रतिशत, 2021 में 42 प्रतिशत और 2025 में 19 प्रतिशत अधिक बारिश हुई थी। बाकी वर्षों में सामान्य से कम वर्षा का ट्रेंड रहा है। वहीं तापमान की बात करें तो पिछले पांच वर्षों में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थिर रहा है। वर्ष 2025 में अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। हाल के 24 घंटे में रांची के तापमान में 3.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि मेदिनीनगर में 1.2 डिग्री की कमी आई है। अगले दो दिनों में तापमान में फिर गिरावट की संभावना जताई गई है। अब तक 50 प्रतिशत कम बारिश राज्य में एक जून से एक जुलाई तक 99.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षापात 197.8 मिमी होना चाहिए था। यानी अब तक लगभग 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। रांची में 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि दुमका में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। गढ़वा और साहिबगंज की स्थिति सबसे खराब बनी हुई है। बीते 24 घंटे में रामगढ़ में सबसे अधिक 60.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि बहरागोड़ा में 84.8 मिमी वर्षा हुई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे निचले खेतों में धान की रोपाई को प्राथमिकता दें, जहां पानी का ठहराव संभव हो।


