Thursday, June 25, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

बंगाल में ‘डाइट पॉलिटिक्स’, अंडा के मुद्दे पर एक साथ आये तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट

बंगाल में ‘डाइट पॉलिटिक्स’, अंडा के मुद्दे पर एक साथ आये तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट

Mid Day Meal: कोलकाता. बंगाल इस एक सरकारी फैसले ने दो गुटों में विभाजित तृणमूल को एक साथ खड़ा कर दिया है. तृणमूल के दोनों गुट एक सुर में सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मिड डे मील में अंडा परोसा जाएगा या नहीं, लेकिन बंगाल में इसको लेकर राजनीति तेज हो गयी है. ममता बनर्जी चुनाव के दौरान भी यह आरोप लगाती रही है कि अगर बीजेपी सत्ता में आई, तो खान-पान की निगरानी होने लगेगी. मांस-मछली और अंडे खाने को नहीं मिलेंगे.

ममता ने जतायी थी आशंका

चुनाव नतीजे आने के महीने भर के भीतर टीएमसी कोलकाता से दिल्ली तक टुकड़े टुकड़े हो गई, लेकिन मिड डे मील से अंडा हटाए जाने के मुद्दे ने दोनों गुटों को एक साथ खड़ा कर दिया है. टीएमसी के बागी गुट के विधायक रितब्रत बनर्जी से लेकर ममता बनर्जी गुट के नेता कुणाल घोष और डेरेक ओ ब्रायन मिड डे मील से अंडा हटाए जाने पर एक जैसे सवाल उठा रहे हैं. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बने अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं, लेकिन ममता बनर्जी की आशंका सही साबित होती दिखने लगी है.

बंगाल में अंडे का नया फंडा

पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने बजट भाषण में इस पायलट प्रोजेक्ट का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि सरकार कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में मिड डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन (ISKCON) को देने जा रही है. साथ ही प्रति थाली भोजन की लागत 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दी गई है. इसके बाद यह आशंका जताई जाने लगी है कि जब इस्कॉन ग्रुप मिड डे मील तैयार करेगा तो वह वेजीटेरियन फूड ही होगा. मतलब, उसमें अंडा नहीं होगा.

रितब्रत ने किया सरकार के फैसले का विरोध

विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है. रितब्रत बनर्जी का कहना है, जब बात प्रोटीन की हो, तो भोजन से अंडा हटाना सही नहीं है, क्योंकि यह प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है. बंगाल में लोग परंपरागत रूप से मांसाहारी भोजन करते हैं. अगर इन्हें हटा दिया जाता है, तो केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाएगा, जो बंगाल की खान-पान की परंपराओं के मुताबिक नहीं है. हम इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं.

बंगाल की परंपरा के खिलाफ

रितब्रत बनर्जी कहते हैं, बंगाल की पांच हजार साल पुरानी परंपरा रही है कि यहां के बच्चों के भोजन में एनिमल प्रोटीन शामिल किया जाता है. अगर इस्कॉन मिड-डे मील से मांसाहार हटाता है, तो इससे न केवल अंडे बंद हो जाएंगे, बल्कि मसूर की दाल भी मेन्यू से बाहर हो जाएगी. यह बंगाल की संस्कृति और परंपरा के माफिक नहीं है. तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि बच्चों को पौष्टिकता से वंचित किया जा रहा है. बहरहाल इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट हमलावर है.

अभी मैन्यू तय नहीं

इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास का कहना है कि अभी मैन्यू तय नहीं है. सोशल मीडिया पर जो वायरल हो रहा है वो मेन्यू इस्कॉन की ओर से जारी नहीं किया गया है. मेन्यू तय होने के बाद आधिकारिक घोषणा की जाएगी. राधारमण दास के बताया कि इस्कॉन फिलहाल 8 राज्यों के 20 से अधिक शहरों में करीब 12 लाख छात्रों को मिड डे मील मुहैया करा रहा है.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

इस्कॉन ने मांसाहार को किया खारिज

शाकाहारी मेन्यू से स्कूली बच्चों के पोषण पर असर से जुड़ी आशंकाओं को खारिज करते हुए राधारमण दास कहते हैं, स्थानीय खान-पान की पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की मदद से स्कूलों का मेन्यू अभी तय किया जाना बाकी है. उनका तर्क है, चैतन्य महाप्रभु बंगाली थे. हम गौड़ीय परंपरा का पालन करते हैं. हम दुनिया भर में बंगाली थाली परोसते हैं. यह कहना गलत है कि बंगाली थाली केवल अंडे या मांस से ही पूरी होती है. यह सोचना गलत है कि थाली में प्रोटीन की कमी होगी.

Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने भरी सदन में लहरा दिया कागज, तारातला मामले में किया फिरहाद हकीम का पर्दाफाश

The post बंगाल में ‘डाइट पॉलिटिक्स’, अंडा के मुद्दे पर एक साथ आये तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट appeared first on Prabhat Khabar.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles