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सिटी एंकर श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति सेक्टर-3 बंग भारती की ओर से इस वर्ष दुर्गापूजा उत्सव को भव्य और यादगार बनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पूजा मैदान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में श्रद्धालुओं को इस बार पश्चिम बंगाल के मायापुर दुर्गा मंदिर के स्वरूप का विशाल और कलात्मक पूजा पंडाल देखने को मिलेगा। पिछले 58 वर्षों से यहां निरंतर बांग्ला विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। पंडाल निर्माण का जिम्मा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया निवासी विद्या सागर गोप और चास पिंड्राजोरा के मातुल चन्द्र महतो को सौंपा गया है। वे अपने 10-15 कुशल सहयोगियों की टीम के साथ दिन-रात पंडाल को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। कारीगरों ने बताया कि इस विशालकाय पंडाल की ऊंचाई 60 फीट और चौड़ाई 90 फीट होगी। इसे मजबूत और भव्य आकार देने के लिए लगभग 2000 से अधिक बांसों, लकड़ी के बीट और थर्मोकोल का उपयोग किया जा रहा है। इस बार पंडाल निर्माण पर करीब 3.3 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। आयोजन की सफलता को जुटे समिति के पदाधिकारी व सदस्य पूजा के सुचारू और सफल संचालन के लिए समिति के सभी पदाधिकारी व सदस्य जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष संग्राम सिंह, जनरल सेक्रेटरी पुलक कुमार घोष और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध वैष्णव के मार्गदर्शन में तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इसके अलावा जयंत कुमार मल्लिक, राजेंद्र राय, सजल सरकार, दीपेंदु पाल, अंजलि सरकार, पारुल गुप्ता सहित अन्य सदस्य दिन-रात व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। षष्ठी को खुलेगा मां का पट, 17 को डांडिया चास के मूर्तिकार राजू पाल बना रहे मां दुर्गा की प्रतिमा पूजा आयोजन समिति के जयंत कुमार मल्लिक ने बताया कि पंडाल के साथ-साथ इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी। पंडाल में 60 हजार रुपये की लागत से बनी माता दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे चास के प्रसिद्ध मूर्तिकार राजू पाल अंतिम रूप दे रहे हैं। पूरे पंडाल और आसपास के क्षेत्र को आधुनिक लाइटिंग से जगमग किया जाएगा। सेक्टर-3 में बन रहा पश्चिम बंगाल के मंदिर का प्रारुप। समिति ने बताया कि षष्ठी के दिन मां का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा और इसी दिन से महाप्रसाद का वितरण भी शुरू होगा। उत्सव के दौरान 17 अक्टूबर को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम डांडिया नाइट का आयोजन किया जाएगा। वहीं बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए चित्रकला प्रतियोगिता भी रखी गई है। विजया दशमी के दिन पारंपरिक सिंदूर खेल के साथ मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी जाएगी।
बंग भारती में दिखेगा बंगाल के मायापुर दुर्गा मंदिर की झलक
