Thursday, July 30, 2026

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बक्सर में सांसद पर अवैध वसूली का आरोप:शिक्षकों से 3-7 हजार रुपए लेने का दावा; RTI में प्रतिनिधि नियुक्ति का प्रावधान नहीं


बक्सर में भाजपा ने सांसद सुधाकर सिंह पर शिक्षा विभाग में लाखों रुपये की अवैध वसूली कराने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा बक्सर के मुख्य प्रवक्ता दीपक सिंह ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दीपक सिंह ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि सांसद सुधाकर सिंह ने शिक्षा विभाग में अपने एक प्रतिनिधि को नियुक्त कर रखा है, जिसके माध्यम से शिक्षकों और कर्मचारियों से अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त संसदीय मंत्रालय के पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी लोकसभा सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र में किसी विभाग के लिए किसी व्यक्ति को अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद, आरोप है कि सांसद सुधाकर सिंह ने पत्रांक BXR/138 दिनांक 28 दिसंबर 2024 के माध्यम से जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर अरविंद कुमार सिंह को अपना प्राधिकृत सहयोगी नामित किया। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब ऐसा कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है, तो यह नियुक्ति किस आधार पर की गई। 7000 रुपए तक की अवैध वसूली
दीपक सिंह के अनुसार, सांसद के संरक्षण में अरविंद कुमार सिंह और उनके सहयोगी अजय सिंह शिक्षा विभाग में नियोजित शिक्षकों और अन्य कर्मियों से हर महीने 3000 से 7000 रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन दोनों के खिलाफ विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज है। भाजपा नेता ने बताया कि अधिकारियों व शिक्षकों पर दबाव बनाने तथा मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनके सीसीटीवी फुटेज होने का भी दावा किया गया है। जिला शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों ने भी इनकी गतिविधियों के खिलाफ लिखित शिकायत की है। पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र पांडेय को जान से मारने की धमकी दिए जाने की शिकायत भी जिलाधिकारी समेत प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई थी। इसके अतिरिक्त, आरोप है कि अरविंद सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए शिक्षा विभाग में बेंच-डेस्क, मिड-डे मील सामग्री, बर्तन वितरण और टूल किट आपूर्ति जैसे कार्यों में करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके हासिल किए हैं। टेंडर में भी कथित अनियमितता सामने आई
दीपक सिंह ने यह भी कहा कि फर्स्ट आइडिया डिजिटल एपलिकेशन नामक कंपनी से जुड़े एक टेंडर में भी कथित अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि मिलते-जुलते नाम वाली दूसरी कंपनी फर्स्ट आइडिया डिजिटल एपलिकेशन के साथ समझौता कर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय सांसद को इसकी जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने इसका समर्थन किया, तो यह बेहद गंभीर सवाल खड़ा करता है। भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि उक्त कंपनी के खाते से अरविंद सिंह, अजय सिंह और उनके रिश्तेदारों के खातों में धनराशि के लेन-देन की बात भी सामने आई है, जिससे पूरे मामले में गहन जांच की आवश्यकता और मजबूत हो जाती है। स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग
भाजपा ने इस मामले में कई प्रमुख मांगें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित वसूली और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच हो तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा फर्स्ट आइडिया डिजिटल एपलिकेशन को हुए भुगतान की विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच के बाद ही शिक्षा विभाग में चल रहे कथित वसूली तंत्र और वित्तीय अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकेगी।

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