![]()
बक्सर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। शनिवार से शुरू हुई रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। इस बारिश से जहां किसानों के चेहरे पर खुशी है, वहीं शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों में पर्याप्त पानी भरने से धान की रोपनी का काम तेजी से चल रहा है, जबकि शहर के कई इलाकों में जलजमाव के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को बक्सर में गरज के साथ लगभग 3.5 से 7.1 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। पूरे दिन आसमान में करीब 99 प्रतिशत बादल छाए रहे और हल्की से मध्यम बारिश होती रही। न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस मौसम विभाग के अनुसार, अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। हवा की गति लगभग 16 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि वातावरण में 79 प्रतिशत नमी बनी रही। लगातार हो रही बारिश से जिले के अधिकांश खेतों में पानी भर गया है, जिससे धान की रोपनी में तेजी आई है। किसानों का कहना है कि समय पर हुई बारिश से सिंचाई की लागत कम होगी और अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ गई है। कई गांवों में किसान सुबह से ही खेतों में धान की रोपनी के कार्य में जुटे रहे। पांडेय पट्टी और यमुना चौक पर जलजमाव दूसरी ओर, शहर में लगातार बारिश ने नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल दी है। बरसात से पहले नालों की सफाई और उड़ाही पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मुनीम चौक, पीसी कॉलेज रोड, पांडेय पट्टी और यमुना चौक सहित कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। सबसे अधिक परेशानी मुनीम चौक से यमुना चौक के बीच देखी गई, जहां शनिवार से जमा पानी रविवार को भी सड़क पर घुटनों तक बना रहा। इससे पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को आवागमन में काफी कठिनाई हुई। कई वाहन पानी में फंसते नजर आए और लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हर साल बारिश के दौरान शहर में ऐसी ही स्थिति बनती है, जिससे नगर परिषद के दावों पर सवाल उठते हैं। नगर परिषद द्वारा नालों की सफाई के दावों के बावजूद थोड़ी ही बारिश में सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। लोगों ने जलनिकासी व्यवस्था में स्थायी सुधार और जलजमाव वाले क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
एक ओर यह बारिश किसानों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आई है, तो दूसरी ओर शहर की बदहाल जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है।

