बेगूसराय सदर में लगातार बढ़ रही गर्मी और तेज धूप का असर अब पशुओं की सेहत पर भी दिखने लगा है। बढ़ते तापमान के कारण पशुओं में हीट स्ट्रोक, शरीर में पानी की कमी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। चांदपुरा स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में कार्यरत पशु चिकित्सक डॉ. नीतीश ने बताया कि गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव दुधारू पशुओं पर पड़ता है। उन्होंने पशुओं को संतुलित एवं हल्का आहार देने की सलाह दी। इसमें हरा चारा, भूसा और खनिज मिश्रण का उपयोग उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। डॉ. नीतीश ने दिनभर स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया, क्योंकि गर्मी में पशुओं को सामान्य दिनों से अधिक पानी की आवश्यकता होती है। डॉ. नीतीश ने पशुपालकों से अपील की कि वे पशुओं को तेज धूप से बचाने के लिए शेड, पेड़ या छायादार स्थान की व्यवस्था करें। साथ ही, पशुओं के शरीर पर दिन में दो से तीन बार पानी का छिड़काव या स्नान कराने से भी उन्हें गर्मी से राहत मिलती है। उन्होंने सलाह दी कि पशुओं को सुबह और शाम के समय ही चराने ले जाएं तथा दोपहर की तेज धूप से बचाएं। पशुशाला में हवा के आवागमन की उचित व्यवस्था भी जरूरी है। यदि कोई पशु तेजी से सांस ले, अत्यधिक लार गिराए, सुस्त या बेचैन दिखाई दे तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। डॉ. नीतीश ने बताया कि बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा संचालित 1962 पशु एंबुलेंस सेवा के माध्यम से पशुपालकों को घर-घर पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने पशुपालकों से गर्मी के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने और पशुओं की समुचित देखभाल करने की अपील की।
बढ़ती गर्मी से पशुओं की सेहत पर खतरा:पशु चिकित्सक ने कहा- मवेशियों को सामान्य दिनों से अधिक पानी की आवश्यकता
बेगूसराय सदर में लगातार बढ़ रही गर्मी और तेज धूप का असर अब पशुओं की सेहत पर भी दिखने लगा है। बढ़ते तापमान के कारण पशुओं में हीट स्ट्रोक, शरीर में पानी की कमी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। चांदपुरा स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में कार्यरत पशु चिकित्सक डॉ. नीतीश ने बताया कि गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव दुधारू पशुओं पर पड़ता है। उन्होंने पशुओं को संतुलित एवं हल्का आहार देने की सलाह दी। इसमें हरा चारा, भूसा और खनिज मिश्रण का उपयोग उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। डॉ. नीतीश ने दिनभर स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया, क्योंकि गर्मी में पशुओं को सामान्य दिनों से अधिक पानी की आवश्यकता होती है। डॉ. नीतीश ने पशुपालकों से अपील की कि वे पशुओं को तेज धूप से बचाने के लिए शेड, पेड़ या छायादार स्थान की व्यवस्था करें। साथ ही, पशुओं के शरीर पर दिन में दो से तीन बार पानी का छिड़काव या स्नान कराने से भी उन्हें गर्मी से राहत मिलती है। उन्होंने सलाह दी कि पशुओं को सुबह और शाम के समय ही चराने ले जाएं तथा दोपहर की तेज धूप से बचाएं। पशुशाला में हवा के आवागमन की उचित व्यवस्था भी जरूरी है। यदि कोई पशु तेजी से सांस ले, अत्यधिक लार गिराए, सुस्त या बेचैन दिखाई दे तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। डॉ. नीतीश ने बताया कि बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा संचालित 1962 पशु एंबुलेंस सेवा के माध्यम से पशुपालकों को घर-घर पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने पशुपालकों से गर्मी के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने और पशुओं की समुचित देखभाल करने की अपील की।

