Saturday, August 15, 2026

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बांका कॉलेज में 17 मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल:अवैध बहाली और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप; 1.5 करोड़ के टीन शेड निर्माण की जांच की मांग


बांका जिले के रजौन प्रखंड स्थित डीएन सिंह भुसिया कॉलेज में अवैध बहाली, लंबित मांगों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है। स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त को भी तृतीय वर्गीय कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह दर्जनों समर्थकों के साथ कॉलेज परिसर में तिरंगा झंडा लेकर अनशन पर बैठे रहे। एक ओर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर उसी परिसर में कर्मचारी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ अनशन पर थे। यह स्थिति क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 बिंदुओं पर रखी मांगें और आरोप
अनशनकारी कन्हैया लाल सिंह ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कुल 17 बिंदुओं पर अपनी मांगें और आरोप रखे हैं। उनका आरोप है कि पूर्व में बिना विज्ञापन के की गई बहाली नियम विरुद्ध थी और उसे निरस्त करने की मांग को लेकर पहले भी अनशन किया गया था। उस समय तत्कालीन प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने शासी निकाय की बैठक में प्राथमिकता के आधार पर बहाली निरस्त करने का आश्वासन दिया था। सिंह का दावा है कि इस आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई या सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने कॉलेज के इंटर नामांकन और प्रायोगिक परीक्षा शुल्क को आधिकारिक खाते में नियमित रूप से जमा नहीं कराने का आरोप लगाया है। इसके अलावा बीए नामांकन और पंजीयन फॉर्म से प्राप्त शुल्क के हिसाब-किताब में भी बड़ी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। 20 लाख रुपये लेने का आरोप
अनशनकारी ने दावा किया कि अनुदान प्राप्त करने के नाम पर शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों से लगभग 20 लाख रुपये की राशि ली गई थी, जिसका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। कॉलेज के खेल मैदान में कल्याण छात्रावास के निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कन्हैया लाल सिंह ने इस निर्माण की वैधता और प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधन (अफिलिएशन) प्राप्त करने के नाम पर कॉलेज निधि से कथित अवैध निकासी का आरोप भी लगाया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लोग अनशन स्थल पर पहुंचकर उनका हालचाल ले रहे हैं और आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, जिससे कॉलेज परिसर का माहौल गर्म बना हुआ है। फिक्स्ड डिपॉजिट के हिसाब-किताब पर भी सवाल
सेमेस्टर परीक्षा शुल्क नियमित रूप से कॉलेज खाते में जमा नहीं होने और बोनाफाइड प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। अनशनकारी ने कॉलेज के करीब चार करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट के हिसाब-किताब को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कॉलेज को आर्थिक सहयोग देने वाले समाजसेवियों और दानदाताओं को सम्मान देने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने 25 मई 2026 को किए गए पूर्व के अनशन का हवाला देते हुए कहा कि उस समय प्राचार्य ने उनकी मांगों को पूरा करने का मौखिक आश्वासन दिया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के मनोनयन पर आपत्ति
शासी निकाय में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के मनोनयन को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। अनशनकारी ने शिक्षा विभाग के 11 मार्च 2023 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के रूप में ऐसे व्यक्ति को शासी निकाय का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए, जो सीनेट और सिंडिकेट दोनों के सदस्य हों। उन्होंने वर्तमान विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के संबंध में भी जांच की मांग की है। इसके अलावा पूर्व शासी निकाय सदस्य डॉ. डीपी सिंह द्वारा कॉलेज के ऊपरी तल पर शेड निर्माण के खर्च का विवरण मांगे जाने के बाद कथित तौर पर शासी निकाय समिति को भंग किए जाने का आरोप लगाया गया है, जबकि शासी निकाय का कार्यकाल तीन वर्ष होता है। प्रभारी प्राचार्य को लेकर भी उठाए सवाल
वर्तमान प्रभारी प्राचार्य पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए अनशनकारी ने किसी वरीय शिक्षक को प्रभार देने और पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। सेमेस्टर पांच, सत्र 2023-27 के विद्यार्थियों से इंटर्नशिप के नाम पर प्रति छात्र 500 रुपये लिए जाने पर भी सवाल उठाया गया है। अनशनकारी का आरोप है कि संबंधित कंपनी सचिव के रिश्तेदार की है और इस मामले की भी जांच होनी चाहिए। महाविद्यालय शासी निकाय में पहले जनप्रतिनिधियों के रूप में स्थानीय विधायक सदस्य अध्यक्ष हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान प्राचार्य द्वारा विधान पार्षद सदस्य को शासी निकाय का सदस्य बना दिया गया है। टीन शेड निर्माण में 1.5 करोड़ रुपये खर्च का आरोप
कॉलेज की दूसरी मंजिल पर टीन शेड निर्माण में करीब 1.5 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने तथा इसके लिए निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। अनशनकारी ने इस पूरे निर्माण की जांच की मांग की है। कन्हैया लाल सिंह का कहना है कि इन मामलों को लेकर विश्वविद्यालय को कई बार आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक जांच टीम कॉलेज नहीं पहुंची है। उन्होंने जांच की धीमी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी वरीय शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाए। अनशनकारी ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मेडिकल टीम ने की स्वास्थ्य जांच
अनशन के दूसरे दिन मेडिकल टीम ने भी अनशनकारी के स्वास्थ्य की जांच की और उन्हें दवा दी। वहीं, प्राचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने अनशनकारी की ओर से लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

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