कोलकाता से गोपाल की रिपोर्ट
Sagarika Ghosh: कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान व बागी सांसदों के अलग संसदीय समूह बनाने की अटकलों के बीच पार्टी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने दलबदल विरोधी कानून को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है. उन्होंने भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची (एंटी-डिफेक्शन लॉ) का हवाला देते हुए कहा कि किसी सांसद या विधायक के लिए केवल सदन के भीतर अलग समूह बनाकर मूल दल से अलग पहचान बनाना कानूनी रूप से मान्य नहीं है. ऐसा करने पर उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है.
सागरिका ने समझाया कानून
सागरिका घोष ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा-चार में साफ लिखा है कि कोई सांसद या विधायक तभी दलबदल कानून से बच सकता है, जब उसकी मूल राजनीतिक पार्टी किसी दूसरी पार्टी में विलय करे. ऐसी स्थिति में संबंधित जनप्रतिनिधि के पास दो विकल्प होते हैं या तो वह विलय होनेवाली पार्टी में शामिल हो, या फिर विलय को स्वीकार न करते हुए अलग रुख अपनाये. लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी शर्त यही है कि मूल पार्टी का वास्तविक विलय होना चाहिए.
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सेपरेट ब्लॉक बनाना कानून की नजर में वैध नहीं
सागरिका ने जोर देकर कहा कि संसद या विधानसभा के भीतर, उसी पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम पर जीतकर आने के बाद, केवल अलग समूह या सेपरेट ब्लॉक बनाना कानून की नजर में वैध नहीं है. यदि कोई सांसद या विधायक ऐसा करता है और उसकी पार्टी का किसी अन्य दल में औपचारिक विलय नहीं हुआ है, तो उसे दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया जा सकता है. सागरिका घोष की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है, जब तृणमूल के कुछ बागी सांसद दिल्ली में अलग संसदीय समूह बनाने के लिए जुटे हैं.
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