
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना में बाढ़ के पानी से घिरे मानिककुंडू गांव में फंसी एक प्रसूता को सुरक्षित निकालने के लिए पुलिस ने जो रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, उसकी स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है. महिला के बाढ़ में फंसे होने की सूचना मिलते ही चंद्रकोना थाने की पुलिस स्पीड बोट लेकर राहत और बचाव कार्य के लिए रवाना हुई. लेकिन जलमग्न इलाके में पहुंचने के बाद पुलिस की राह आसान नहीं थी.
धान की फसल बनी परेशानी, ऐसा निकाला स्पीड बोट
धान की फसल के कारण स्पीड बोट को आगे बढ़ाने में लगातार परेशानी आने लगी. धान के पौधों को नुकसान से बचाने के लिए पुलिस ने स्पीड बोट का इंजन बंद करने का फैसला लिया. इसके बाद चंद्रकोना थाने के ओसी खुद बांस के सहारे स्पीड बोट को खींचते हुए आगे बढ़ने लगे. उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी कमर तक गहरे पानी में उतरकर स्पीड बोट को पीछे से धक्का देना शुरू कर दिया.
2-3 किलोमीटर तक स्पीड बोट को पुलिसकर्मियों ने लगाया धक्का
बाढ़ के पानी, धान की फसल और कठिन रास्ते के बीच पुलिस टीम ने करीब 2 से 3 किलोमीटर का जलमार्ग पार किया और आखिरकार मानिककुंडू गांव तक पहुंचने में सफल रही. गांव पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने वहां फंसी प्रसूता को सुरक्षित रूप से स्पीड बोट पर बैठाया और उसे बाढ़ प्रभावित इलाके से बाहर लेकर आयी.
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क्षीरपाई ग्रामीण अस्पताल में हुआ महिला का इलाज
इसके बाद महिला को क्षीरपाई ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ. बाढ़ की विकट परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों द्वारा चलाये गये इस रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थानीय लोगों ने खुलकर सराहना की. खासकर स्पीड बोट को आगे बढ़ाने के लिए खुद पानी में उतरकर उसे खींचने और धक्का देकर मरीज तक पहुंचने की पुलिसकर्मियों की पहल लोगों में चर्चा का विषय बन गया.
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