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नगर विकास विभाग ने झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनअथॉराइज कंसट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स 2026 को लागू कर दिया है। विभाग ने सोमवार को इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत 31 दिसंबर 2024 से पहले तक बिना नक्शा के बने भवनों का नक्शा पास किया जाएगा। अधिसूचना जारी होने से 60 दिनों के अंदर लोगों को ऑनलाइन मोड में आवेदन करना होगा। किसी भी सूरत में ऑफलाइन आवेदन जमा नहीं होगा। निर्धारित तिथि तक आवेदन नहीं देने वाले भवन मालिकों के खिलाफ अवैध निर्माण का केस दर्ज करते हुए उसे तोड़ने की कार्रवाई होगी। इस नियमावली के तहत तीन मंजिलें भवन यानि 10 मीटर या जी प्लस टू और 300 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बने भवन ही नियमित किए जाएंगे। सिर्फ उन्हीं भवनों को वैध किया जाएगा, जिनका निर्माण रैयती जमीन पर हुआ है। आदिवासी, सरकारी या नदी नाला के आसपास बने भवनों को किसी भी सूरत में नियमित नहीं किया जाएगा। गलत जानकारी देने पर आवेदन होगा रद्द, पैसा भी जब्त नियमावली के तहत बने हुए घर कान नक्शा पास कराने के दौरान आवेदन में कोई गलत जानकारी दी जाती है तो आवेदन को रद कर दिया जाएगा। साथ ही आवेदक द्वारा जमा की गई राशि जब्त कर ली जाएगी। इसके बाद संबंधित भवन को तोड़ने की कार्रवाई होगी। यदि भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है, तो भवन मालिक को शपथ पत्र देना होगा कि वह नियमितीकरण की मंजूरी के 6 महीने के अंदर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करा लेगा। 50% फीस देना होगा आवासीय भवन के लिए 10 हजार व व्यावसायिक भवन के लिए 20 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन के समय आवेदक को कम से कम 50% फीस का भुगतान करना होगा। शेष राशि 3 किस्तों में जमा करनी होगी। निर्धारित शुल्क के अलावा लेबर सेस 17.22 रुपए की दर से देना होगा। मतलब 1000 वर्गफीट का नक्शा पास कराने के लिए 17220 रु.देने होंगे। इसके अलावा आर्किटेक्ट को 15 रुपए प्रति वर्गफीट की दर से फीस लेगा। ऑनलाइन होगा आवेदन भवन मालिकों को बिल्डिंग प्लान एप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए आर्किटेक्ट या लाइसेंसी इंजीनियर से भवन जैसा है, वैसा ही नक्शा बनवाना होगा। नक्शा के साथ साइट प्लान, भवन की फोटो, जमीन का डीड, करेक्शन स्लिप, खतियान की सत्यापित प्रति, लगान रसीद, होल्डिंग नंबर की रसीद, स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट, व्यवसायिक भवनों के लिए अग्निशमन विभाग का एनओसी देना होगा। अवैध निर्माण का केस चल रहा है तो वापस होगा वैसे भवन, जिन पर अवैध निर्माण का केस किया गया है, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। ऐसे भवन मालिक भी अपने भवनों का नक्शा पास करा सकते हैं। नक्शा स्वीकृत होने के बाद भवन मालिक को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही उनके ऊपर पहले से चल रहे केस वापस ले लिए जाएंगे। रांची में करीब 2.50 लाख छोटे-बड़े घर बने हुए हैं। इसमें से मात्र 55 हजार भवनों का ही नक्शा स्वीकृत हैं। करीब 1.95 लाख भवन बिना नक्शा के बने हैं। इस नियमावली से कम से कम एक लाख भवनों के वैध होने का रास्ता साफ होगा। करीब 95 हजार भवन अवैध ही रह जाएंगे, क्योंकि इनमें से अधिकतर भवनों का निर्माण आदिवासी जमीन पर किया गया है। ऐसे भवन मालिकों की परेशानी बढ़ने वाली है।


