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रिम्स में निजी अस्पतालों से मरीजों के रेफरल की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की गई है। इसके तहत अब किसी भी निजी अस्पताल को गंभीर मरीज को रिम्स भेजने से पहले उसे स्टेबल करना अनिवार्य होगा। बिना उचित इलाज और स्थिरीकरण के मरीज को रेफर करना मेडिकल लापरवाही मानी जाएगी। संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। एसओपी का उद्देश्य अनावश्यक रेफरल रोकना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि किसी मरीज को आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत है तो उसे निजी अस्पताल से भेजने से पहले रिम्स में बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता की पुष्टि करना अनिवार्य होगा। -शेष पेज 15 पर निजी अस्पतालों से लिए गए सुझाव रिम्स शासी परिषद की ओर से रिम्स प्रबंधन को निर्देश दिया गया था कि निजी अस्पतालों के साथ बैठक कर उनके सुझाव लिए जाएं और रेफरल प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए समन्वय बनाया जाए। इसी क्रम में शुक्रवार को रिम्स में बैठक की गई, जिसमें शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में मेदांता, सैमफोर्ड और मां राम प्यारी अस्पताल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और एसओपी के प्रावधानों पर चर्चा कर अपने सुझाव भी दिए। हालांकि बैठक में मणिपाल अस्पताल और पारस अस्पताल की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं आया। रिम्स प्रबंधन का मानना है कि नई एसओपी लागू होने से रेफरल प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।
बिना स्टेबल किए मरीज को रेफर करने वाले निजी अस्पतालों पर होगी कार्रवाई
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