Tuesday, May 5, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

विधानसभा में रिक्त पदों को लेकर विपक्ष ने घेरा:नियुक्तियों-आउटसोर्सिंग पर तीखी बहस, सरकार बोली – स्थाई बहाली पर है फोकस


झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन राज्य में रिक्त पदों और आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्य के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा नई नियुक्तियों के लिए अधियाचना भेजने में देरी क्यों की जा रही है। इसका असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। इस पर मंत्री दीपक बिरुवा ने जवाब देते हुए कहा कि जैसे-जैसे विभागों से रिक्त पदों की जानकारी मिलती है, सरकार तुरंत जेपीएससी और जेएसएससी को अधियाचना भेज देती है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया निरंतर चल रही है। सरकार इसे पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ा रही है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर विपक्ष का हमला सदन में भाजपा विधायक सीपी सिंह ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2019 से सत्ता में होने के बावजूद सरकार अब तक नियुक्तियों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं बना पाई है। उनका आरोप था कि लगभग सभी विभाग आउटसोर्सिंग के भरोसे चल रहे हैं और सरकार आर्थिक तंगी का हवाला देकर स्थाई नियुक्तियों से बच रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार बहाली प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट समय सीमा तय करे। इस पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य में आउटसोर्सिंग व्यवस्था की शुरुआत पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। अब तक 20 से 30 हजार से अधिक पदों पर स्थाई नियुक्तियां की जा चुकी हैं। अफीम की खेती और पुलिस-अपराधी गठजोड़ का मुद्दा भी उठा सदन में विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य में अफीम की खेती और मादक पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाते हुए अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 27,015 एकड़ भूमि पर अफीम की खेती नष्ट किए जाने का आंकड़ा सामने आया है, जो चिंताजनक है। उन्होंने आशंका जताई कि इसमें पुलिस और अपराधियों के बीच संभावित गठजोड़ की जांच होनी चाहिए। इस पर मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जैसे ही किसी भी तरह का इनपुट मिलता है, प्रशासन तत्काल कार्रवाई करता है। यदि इस मामले में कोई बड़ा अधिकारी भी संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नक्सल गतिविधि और प्रशासनिक नियमावली पर भी चर्चा विधानसभा में नक्सल गतिविधियों और प्रशासनिक नियमावली में संशोधन का मुद्दा भी उठा। विधायक सरयू राय ने कहा कि जब डीजीपी का कहना है कि राज्य में उग्रवाद काफी हद तक समाप्त हो चुका है, तो यह स्पष्ट किया जाए कि वे सीमित क्षेत्र कौन से हैं जहां अभी भी नक्सली सक्रिय हैं। इस पर मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य में लगातार अभियान चलाकर उग्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा रहा है। नक्सली अब केवल 10 से 20 प्रतिशत क्षेत्रों तक ही सीमित रह गए हैं। वहीं विधायक निरल पूर्ति ने झारखंड प्रशासनिक सेवा नियमावली में संशोधन की मांग की। इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को लेवल-14 का वेतनमान दिया जाएगा और संबंधित पदों को उसी श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा बाह्य कोटा से कार्यरत अधिकारियों और सहायकों को भी कुछ सरकारी सुविधाएं देने की जानकारी सदन में दी गई। सदन में बंगाल विवाद, मरांडी के आरोप पर सत्ता पक्ष का पलटवार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब झारखंड की राजनीति में भी गूंजने लगा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ममता सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ा सवाल उठाते हुए इसे संवैधानिक गरिमा का अपमान बताया है। मरांडी ने कहा कि राष्ट्रपति किसी सरकारी कार्यक्रम में नहीं बल्कि संथाल समाज के एक पूर्व निर्धारित राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं, इसके बावजूद कार्यक्रम स्थल अंतिम समय पर बदल दिया गया और लोगों को वहां पहुंचने से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के आगमन पर न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री मौजूद था, यहां तक कि संबंधित डीएम भी उन्हें रिसीव करने नहीं पहुंचे। दूसरी ओर झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा अपनी सुविधा के अनुसार संवैधानिक पदों का इस्तेमाल करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि राम मंदिर उद्घाटन और नए संसद भवन के लोकार्पण के समय राष्ट्रपति को क्यों नहीं बुलाया गया। वहीं कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कहा कि राष्ट्रपति का अपमान नहीं हुआ, बल्कि उन्हें भाजपा की राजनीति में नहीं पड़ना चाहिए था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं अपमान हुआ है तो वह निश्चित रूप से गलत है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles