
पटना से कृष्ण कुमार की रिपोर्ट
ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में गुणवत्ता तय करने के लिए सभी जिला मुख्यालयों में जांच प्रयोगशाला सहित तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था की जायेगी. इसके लिए राज्य सरकार ने करीब छह करोड़ 92 हजार रुपये का आवंटन किया है. इसका मकसद ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण से पहले उसमें इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की जांच करना है. इससे सड़कों और पुलों के निर्माण के बाद उनके टिकाऊ होने की सुनिश्चितता बढ़ जायेगी. हालांकि प्रयोगशाला के साथ ही नियमित रूप से नमूने लेना, निर्माण स्थल पर जांच करना, प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की तैनाती, स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट और दोष मिलने पर कार्रवाई करना भी जरूरी होगा.
फिलहाल 10 जिला मुख्यालयों में ही प्रयोगशाला
ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत फिलहाल 10 जिला मुख्यालयों में ही ये प्रयोगशाला हैं. इनमें पटना, सारण, गया, रोहतास, भागलपुर, पूर्णिया, सहरसा, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण और दरभंगा जिला शामिल हैं. इनके अलावा 28 जिला मुख्यालयों में प्रयोगशाला नहीं था. अब प्रत्येक जिला मुख्यालय में नये प्रयोगशाला के लिए जांच उपकरण की खरीद होगी.
प्रत्येक जिले में 12 लाख 14 हजार 214 रुपये आवंटित
इसके लिए प्रत्येक जिले में 12 लाख 14 हजार 214 रुपये आवंटित किये गये हैं. इस तरह राज्य सरकार ने इस मद में तीन करोड़ 39 लाख 97 हजार 992 रुपये का आवंटन किया है. साथ ही पहले मौजूद प्रयोगशाला वाले जिलों में से प्रत्येक में जांच उपकरणों की मरम्मति के लिए दो-दो लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. सभी 38 जिलों में दो-दो कंप्यूटर लगाये जायेंगे. इसके लिए प्रत्येक जिले में एक लाख 68 हजार रुपये दिये जायेंगे.
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जांच प्रयोगशाला से यह होगा प्रमुख फायदा
–निर्माण सामग्री की जांच: सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, बालू, गिट्टी, सीमेंट और बिटुमेन की गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी.
-सड़क की मजबूती का आकलन: मिट्टी की भार सहने की क्षमता, मिट्टी और गिट्टी की दबाई, सड़क की परतों की मोटाई सहित कंक्रीट की मजबूती जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सकेगी.
-घटिया निर्माण पर रोक: यदि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल होगा, तो जांच में इसका पता लगाया जा सकेगा. इससे संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी.
-जांच रिपोर्ट मिलने में आसानी: प्रत्येक जिले में प्रयोगशाला होने से नमूनों को दूर स्थित प्रयोगशालाओं में भेजने की जरूरत कम होगी. इससे जांच रिपोर्ट जल्दी मिलने और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करने की संभावना बढ़ेगी.
-सरकारी राशि के बेहतर इस्तेमाल में मदद: गुणवत्ता की जांच से ऐसी सड़कों के निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, जिन्हें खराब सामग्री या तकनीकी खामियों के कारण जल्द मरम्मत की जरूरत पड़ जाती है. इससे रखरखाव पर होने वाला अनावश्यक खर्च कम किया जा सकता है.
-भुगतान और रखरखाव की निगरानी: जांच रिपोर्ट को निरीक्षण और अन्य गुणवत्ता रिकॉर्ड से जोड़ने पर ठेकेदारों के काम का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकता है. इससे निर्धारित मानकों के पालन को प्रोत्साहन मिलेगा.
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