Wednesday, September 16, 2026

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बिहार के बाढ़ में फरिश्ता बनीं लेडी 'सिंघम':भागलपुर की CO ट्रैक्टर पर निकलीं, जहानाबाद की DM पानी के बीच से लोगों तक पहुंची; एक्ट्रेस भी बांट रहीं राहत


बिहार में जैसे-जैसे बाढ़ का पानी बढ़ा, महिला अधिकारी भी अपने ऑफिस से निकलकर सड़कों और गांवों तक पहुंचने लगीं। कहीं रास्ता बंद मिला तो भागलपुर के शाहकुंड की CO हर्षा कोमल ट्रैक्टर पर बैठकर राहत सामग्री लेकर निकल पड़ीं। पटना सिटी की SDO कशिश बक्शी गंगा के बढ़ते पानी के बीच घाटों का जायजा लेने पहुंचीं। जहानाबाद की DM छिरिङ वाई भूटिया जलजमाव वाले इलाकों और खेतों तक पहुंचीं और किसानों से फसल के नुकसान की जानकारी ली। वहीं, पूर्व IPS काम्या मिश्रा बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री बांटती नजर आईं। भोजपुरी अभिनेत्री पाखी हेगड़े भी मुंबई से बिहार पहुंचीं और भोजपुर के बाढ़-कटाव प्रभावित गांव पिपरपांती में लोगों के बीच राहत लेकर पहुंचीं। इस बार इन महिलाओं का अंदाज सिर्फ दफ्तर से आदेश देने का नहीं, बल्कि खुद सड़क, खेत, घाट और बाढ़ प्रभावित गांवों तक पहुंचकर लोगों की मदद करने का रहा। किसी ने ट्रैक्टर को अपना साधन बनाया तो किसी ने नाव और घाटों पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। बाढ़ के बीच इन महिलाओं की ये तस्वीरें बताती हैं कि संकट के समय जिम्मेदारी सिर्फ कुर्सी तक सीमित नहीं रहती। अब एक-एक कर के सारी लेडी सिंघम की स्टोरी यहां पढ़िए… बाढ़ पीड़ितों की बीच फरिश्ता बनकर पहुंची महिलाओं की तस्वीरें देखिए… 1. हर्षा कोमल: रास्ता बंद था तो ट्रैक्टर को बनाया सरकारी गाड़ी भागलपुर के शाहकुंड की अंचल अधिकारी हर्षा कोमल इन दिनों अपने एक वीडियो के कारण चर्चा में हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए जब उन्हें सरकारी गाड़ी नहीं मिली तो उन्होंने ट्रैक्टर का सहारा ले लिया। दरअसल, जिस रास्ते से CO को जाना था, वहां पर कोई भी आम गाड़ियां नहीं चलाई जा सकती थी। रास्ता पूरी तरह से खराब था। इसी वजह से उन्होंने पास के गांव में मौजूद ट्रैक्टर को अपना सहारा बना लिया। उन्होंने ट्रैक्टर पर राहत सामग्री रखी और वह खुद प्रशासनिक टीम के साथ उस पर बैठकर प्रभावित इलाके की तरफ निकल पड़ीं। वीडियो सामने आने के बाद उनकी फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई। इस फोटो-वीडियो के बाद स्थानीय लोग उन्हें प्यार से ‘ट्रैक्टर वाली मैडम’ भी कहना शुरू कर दिए हैं। बता दें कि भागलपुर में गंगा के उफान से जिले की 86 से अधिक पंचायतों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई इलाकों में सड़क और आवागमन के रास्ते पानी में डूब गए हैं। ऐसे में राहत और सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश और जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में प्रभावित प्रखंडों और पंचायतों में राहत कार्य लगातार चलाया जा रहा है। कौन है अधिकारी हर्षा कोमल? मधेपुरा के चौसा प्रखंड के कलासन गांव की रहने वाली हर्षा कोमल ने 64वीं BPSC परीक्षा में 607वां रैंक हासिल किया था। इसके बाद वो राजस्व पदाधिकारी के पद पर सिलेक्ट हुईं। हर्षा कोमल स्वतंत्रता सेनानी उदित नारायण सिंह की परपोती हैं। हर्षा के पिता शैलेश नंदन दिवाकर पूर्णिया के सेवानिवृत्त ADM रह चुके हैं। उनके चाचा भास्कर सिंह ने बताया कि, साल 2021 में उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद भी हर्षा की मां कल्याणी देवी ने उनकी पढ़ाई को लेकर हमेशा सकारात्मक माहौल बनाए रखा। परिवार के सहयोग और हर्षा की मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने BPSC परीक्षा में सफलता हासिल की। हर्षा दो भाई और दो बहनों में सबसे छोटी हैं। पढ़ाई के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी थी। 2. कशिश बख्शी: पटना के गंगा घाटों का किया निरीक्षण बिहार में बाढ़ से अभी भी कई जिलों में हालात खराब है। पटना सिटी में भी गंगा रहने की वजह से यहां के निचले इलाकों में स्थिति बहुत ही खराब नजर आ रही है। गंगा के जलस्तर बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चिंता सिर्फ नदी का पानी नहीं, बल्कि घाटों और निचले इलाकों में लोगों की आवाजाही को लेकर रहती है। इसी बीच पटना सिटी की SDO कशिश बख्शी का एक वीडियो सामने आया, इसमें वो प्रशासनिक मोर्चा संभालते नजर आईं। बाढ़ की स्थिति के बीच कशिश बख्शी ने अधिकारियों के साथ भद्रघाट से कंगन घाट तक गंगा मार्ग का निरीक्षण किया। जलस्तर बढ़ने और रास्तों पर पानी आने के बाद लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए। खासकर बच्चों और महिलाओं को गंगा की ओर जाने और नदी में नहाने से रोकने पर जोर दिया गया। जलजमाव वाले इलाकों में मोटर लगाकर पानी निकालने के निर्देश भी दिए गए। यहां उनका काम सिर्फ नदी का जलस्तर देखने तक सीमित नहीं था। घाटों पर लोगों की आवाजाही, निचले इलाकों में पानी, राहत-बचाव की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था- इन सभी पहलुओं को एक साथ मॉनिटर करना था। बाढ़ के खतरे के बीच SDRF और गोताखोरों की तैनाती की व्यवस्था भी की गई। गंगा के दूसरी तरफ दियारा इलाकों में पानी बढ़ने से लोगों की आवाजाही का मुख्य सहारा नाव बन गया था। ऐसे में घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और नदी के किनारे लोगों को जाने से रोकना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण था। बाढ़ के दौरान उनकी जिम्मेदारी सिर्फ निरीक्षण तक सीमित नहीं रही। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और राहत-बचाव टीम को जरूरी निर्देश दिए। गंगा किनारे बढ़ते पानी के बीच लोगों को सुरक्षित रखने, घाटों पर अनावश्यक आवाजाही रोकने और जरूरत पड़ने पर नाव, SDRF और गोताखोरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। कशिश बख्शी का अंदाज इसलिए अलग दिखा क्योंकि उन्होंने ऑफिस से निर्देश जारी करने के बजाय खुद संवेदनशील घाटों का जायजा लिया। कौन है अधिकारी कशिश बख्शी? कशिश बख्शी बिहार प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं और पटना सिटी की SDO के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने UPSC CSE-2023 में 54वीं रैंक हासिल की थी, जो उनका तीसरा प्रयास था। पहले प्रयास में प्रीलिम्स में 3 अंक और दूसरे प्रयास में मेन्स में 10 अंक से चूक गई थीं। दो असफलताओं के बाद तैयारी की रणनीति बदली और 30+ प्रीलिम्स मॉक और 30+ मेन्स राइटिंग प्रैक्टिस की। उनके पिता प्रवीण बक्शी आर्मी में मेजर जनरल हैं। बचपन से पिता को यूनिफॉर्म में देशसेवा करते देख सिविल सर्विस में आने की उन्हें प्रेरणा मिली थी। आर्मी के मोटे ‘Service Before Self’ को अपना आदर्श बनाया। अब महिलाओं और बच्चों के लिए काम करना चाहती हैं। पिता की अलग-अलग पोस्टिंग के कारण 10 स्कूलों में पढ़ाई की। 10वीं में 10 CGPA और 12वीं में 95% अंक हासिल किए। कशिश की मां लॉ ग्रेजुएट और शिक्षिका रही हैं, जबकि छोटे भाई यश बक्शी कंप्यूटर इंजीनियर हैं। उनका सफलता मंत्र रहा खुद से ईमानदारी और सुनो सबकी, करो मन की। 3. छिरिङ वाई भूटिया: शहर से लेकर खेत तक पहुंचीं जहानाबाद की DM जहानाबाद की डीएम छिरिङ वाई भूटिया भी बाढ़ और जलजमाव की स्थिति में लगातार ग्राउंड पर नजर आईं। जिले में दरधा और मोरहर नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनी। सितंबर की शुरुआत में जहानाबाद शहर के कुछ हिस्सों में पानी पहुंचने की स्थिति बनी तो जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। डीएम ने प्रभावित इलाकों का मौके पर जाकर जायजा लिया। इसके बाद रतनी फरीदपुर प्रखंड के जलजमाव प्रभावित क्षेत्रों का भी ग्राउंड विजिट किया। नेहालपुर, नोआवां और रघुनिचक समेत प्रभावित इलाकों में पहुंचकर उन्होंने खेतों की स्थिति देखी। सिर्फ अधिकारियों से रिपोर्ट लेने के जगह किसानों और ग्रामीणों से सीधे बात कर यह समझने की कोशिश की कि पानी से उनकी फसल और रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना असर पड़ा है। इस दौरे में फसल नुकसान, बिजली और पेयजल जैसी समस्याओं को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए। यानी डीएम के दौरे का फोकस सिर्फ पानी कितना है तक नहीं था, बल्कि पानी के बाद लोगों के सामने क्या-क्या संकट आएगा, इस पर भी था। कौन हैं छिरिङ वाई भूटिया? 2013 बैच की IAS अधिकारी छिरिङ वाई भूटिया मूल रूप से सिक्किम की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन किया है। उनका शुरुआती प्रशासनिक करियर पश्चिम बंगाल कैडर में रहा। वित्त, अनुमंडल प्रशासन, अपर जिलाधिकारी, भूमि और राजस्व और सिलीगुड़ी नगर निगम आयुक्त जैसे पदों पर काम किया। 2025 में अंतर-कैडर ट्रांसफर के बाद वह बिहार कैडर में आईं। जून 2026 से जहानाबाद की जिलाधिकारी हैं। जहानाबाद में उनकी पहचान ग्राउंड पर जाकर काम करने वाली अधिकारी के रूप में बनी है। स्कूल निरीक्षण के दौरान कभी बच्चों के साथ बास्केटबॉल खेलती दिखीं, कभी जमीन पर बैठकर मिड-डे मील खाया और हाल में कक्षा में बच्चों के बीच पीछे की बेंच पर बैठकर पढ़ाई का स्तर जांचा। स्कूल निरीक्षण के दौरान कम छात्र उपस्थिति और पढ़ाई की व्यवस्था में खामियां मिलने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों से जवाब भी मांगा। उनका काम करने का अंदाज फाइल और ऑफिस तक सीमित नहीं है। वे स्कूल, खेत और प्रभावित इलाकों में खुद पहुंचकर स्थिति देखने और लोगों से सीधे बात करने के लिए जानी जा रही हैं। 4. काम्या मिश्रा: वर्दी नहीं, फिर भी बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं इस लिस्ट में काम्या मिश्रा की कहानी बाकी अधिकारियों से अलग है। वह अब सरकारी पद पर नहीं हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा भोजपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचीं और पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री बांटी। बाढ़ के बीच उन्होंने लोगों के साथ समय बिताया, उनकी समस्याएं सुनीं और राहत सामग्री अपने हाथों से वितरित की। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने प्रभावित लोगों से उनकी परेशानियां जानीं और यह समझने की कोशिश की कि राहत के अलावा उन्हें तत्काल किस तरह की मदद की जरूरत है। यही वजह है कि काम्या मिश्रा की तस्वीर सरकारी अधिकारियों की तरह प्रशासनिक निरीक्षण वाली नहीं, बल्कि सीधे राहत बांटने वाली दिखी। पूर्व आईपीएस होने के कारण उनके लिए पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली नई नहीं है, लेकिन इस बार वह किसी सरकारी ड्यूटी पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहल के तौर पर बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं। भोजपुर में बाढ़ ने गंगा के किनारे बसे इलाकों में बड़ी परेशानी पैदा की है। ऐसे में राहत सामग्री लेकर लोगों के बीच जाना सिर्फ मदद पहुंचाना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को यह भरोसा दिलाना भी है कि संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े होने वाले लोग मौजूद हैं। कौन है काम्या मिश्रा? काम्या मिश्रा पूर्व IPS अधिकारी हैं। उन्होंने पुलिस सेवा में रहते हुए बिहार में काम किया और अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए पहचान बनाई। वह IPS अधिकारी अवधेश दीक्षित की पत्नी हैं। अवधेश दीक्षित वर्तमान में भोजपुर के SP हैं। काम्या मिश्रा ने बाद में IPS सेवा से इस्तीफा दे दिया, लेकिन सामाजिक सरोकारों से उनका जुड़ाव बना रहा। 2026 की बिहार बाढ़ में वे भोजपुर के प्रभावित इलाकों में पहुंचीं। उन्होंने बाढ़ पीड़ित परिवारों के साथ समय बिताया, उनकी समस्याएं सुनीं और जरूरतमंदों के बीच राहत सामग्री बांटी। इस दौरान उनकी खासियत यह रही कि वे सिर्फ राहत सामग्री देकर वापस नहीं लौटीं, बल्कि पीड़ितों के बीच बैठकर उनकी परेशानियां सुनीं और उनके दर्द को समझने की कोशिश की। 5. पाखी हेगड़े: मुंबई से बिहार आईं, कटाव से उजड़े गांव में पहुंचीं पांचवीं कहानी ग्लैमर की दुनिया से निकलकर बाढ़ की जमीन तक पहुंचने की है। भोजपुरी अभिनेत्री पाखी हेगड़े भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के पिपरपांती गांव पहुंचीं। यहां गंगा के कटाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई परिवारों के घर तक नदी में समा चुके हैं। 11 सितंबर को पाखी हेगड़े बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचीं और पीड़ित लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी। उन्होंने गांव के लोगों से मुलाकात की और उनकी परेशानियां सुनीं। उनके इस दौरे की खास बात यह थी कि वह सिर्फ किसी कार्यक्रम में शामिल होने नहीं पहुंचीं, बल्कि ऐसे गांव में गईं जहां बाढ़ और कटाव ने लोगों की जिंदगी को सीधे प्रभावित किया है। कौन हैं एक्ट्रेस पाखी हेगड़े? पाखी हेगड़े भोजपुरी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं। वे भोजपुरी फिल्मों के साथ टेलीविजन और अन्य मनोरंजन प्रोजेक्ट्स में भी काम कर चुकी हैं। भोजपुरी फिल्मों में उन्होंने मनोज तिवारी और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ जैसे लोकप्रिय कलाकारों के साथ काम किया है। लंबे समय से भोजपुरी इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के कारण उनकी अपनी पहचान और बड़ी फैन फॉलोइंग है। मूल रूप से महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाली पाखी हेगड़े ने मनोरंजन की दुनिया में कामयाबी हासिल करने के बाद भी सामाजिक मुद्दों से खुद को जोड़े रखा है। सितंबर 2026 में बिहार में आई बाढ़ के दौरान उनका एक अलग रूप देखने को मिला। गंगा कटाव से प्रभावित परिवारों से मिलीं और राहत सामग्री बांटी। पीड़ित लोगों की परेशानियों को भी सुना। कौन हैं अक्षरा सिंह? भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री और गायिका अक्षरा सिंह आज फिल्मी दुनिया से निकलकर बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं। 15 सितंबर को वे भोजपुर के शाहपुर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित जवइनिया गांव पहुंचीं। यहां गंगा की बाढ़ से प्रभावित होकर जवइनिया बांध पर शरण लिए सैकड़ों परिवारों के बीच उन्होंने राहत सामग्री बांटी। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां भी जानीं। अक्षरा सिंह भोजपुरी फिल्मों की चर्चित अभिनेत्रियों में हैं। अभिनय के साथ वे गायिका के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री में लंबे समय से सक्रिय अक्षरा की सोशल मीडिया पर भी बड़ी फैन फॉलोइंग है। बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बाद कुछ दिन पहले ही अक्षरा सिंह ने लोगों से बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने बिहार के हालात पर चिंता जताते हुए कहा था कि संकट की इस घड़ी में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचनी चाहिए, लेकिन 15 सितंबर को उन्होंने खुद बाढ़ प्रभावित इलाके का रुख किया। शाहपुर के जवइनिया में वे उन परिवारों के बीच पहुंचीं, जो बाढ़ के कारण अपना घर छोड़कर बांध पर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने राहत सामग्री वितरित की और लोगों से बातचीत की। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में लोग भी जुटे। फिल्मी पर्दे पर ग्लैमर और रोशनी के बीच नजर आने वाली अक्षरा का बाढ़ के बीच यह अंदाज अलग रहा। इस बार वे कैमरे के सामने किसी फिल्म के प्रमोशन के लिए नहीं, बल्कि बाढ़ में अपना घर-बार छोड़कर बांध पर रह रहे परिवारों के बीच मदद लेकर पहुंचीं। बता दें कि इन सभी महिलाओं की भूमिका एक जैसी नहीं है। तीन प्रशासनिक अधिकारी हैं, एक पूर्व पुलिस अधिकारी और 2 अभिनेत्री शामिल हैं। किसी के पास सरकारी जिम्मेदारी है तो किसी ने निजी स्तर पर मदद का रास्ता चुना है, लेकिन बाढ़ के इस मौसम में इनकी तस्वीरों में एक कॉमन चीज नजर आती है- सभी लोग मददगारों के लिए ग्राउंड पर मौजूद हैं।

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