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नेपाल और तिब्बत में आई अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइड का असर बिहार के पर्यटन कारोबार पर पड़ने लगा है। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही नेपाल यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। इससे करीब 5 करोड़ का नुकसान हुआ है। काठमांडू जाने वाले हाईवे के हिस्से बाढ़ में बह गए हैं। इसके चलते 10 दिनों से गाड़ियां बिहार से नेपाल नहीं गई हैं। बिहार से नेपाल के लिए पर्यटकों की बुकिंग करीब 90% तक कम हो गई है। लोग काठमांडू-पोखरा के टूर कैंसिल करवा रहे हैं। भारत के विभिन्न राज्यों के पर्यटक पहले बिहार आते हैं फिर नेपाल जाते हैं। सावन में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन और सितंबर महीने में नेपाल में कॉरपोरेट ग्रुप की मीटिंग होती है। बाढ़ के चलते ये रद्द कर दी गई है। भक्त पशुपतिनाथ मंदिर नहीं जा पा रहे हैं। नेपाल त्रासदी से बिहार के पर्यटन उद्योग पर कितना असर पड़ा है? नेपाल की आनेजाने की क्या स्थिति है? पढ़िए रिपोर्ट…। जनकपुर-जटही से काठमांडू बस सेवा बंद, पर्यटकों की आवाजाही शून्य बस सेवाएं बंद होने के बाद जनकपुर और जटही के रास्ते काठमांडू और पोखरा जाने वाले पर्यटकों की आवाजाही लगभग थम गई है। त्रिशूली नदी के आसपास बने असामान्य हालात को देखते हुए बस संचालकों ने सेवाएं रोक दी हैं। भारत-नेपाल सीमा से पर्यटकों और निजी वाहनों की आवाजाही में भी काफी कमी आई है। सड़क संपर्क प्रभावित होने और बस सेवाएं रुकने के कारण पटना, गया और मुजफ्फरपुर के टूर ऑपरेटरों को लगातार बुकिंग रद्द करने के अनुरोध मिल रहे हैं। टूर ऑपरेटरों के अनुसार नेपाल के साथ-साथ दार्जिलिंग, सिक्किम और अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों के लिए भी लोग अपनी यात्राएं स्थगित या रद्द कर रहे हैं। नेपाल की बुकिंग में 90% तक गिरावट टूर ऑपरेटर सौरभ खेमका ने कहा, ‘हमारे यहां से नेपाल का रेगुलर टूर चलता है। बिहार के बाहर से भी लोग पटना आते हैं और यहां से नेपाल में पशुपतिनाथ और जनकपुर जाते हैं। त्रासदी के बाद अब हमें नेपाल के लिए कोई क्वेरी नहीं आ रही है। यहां तक कि पहले से जो बुकिंग थी, उसे भी लोगों ने कैंसिल कर दिया है।’ ‘1 महीने बाद की बुकिंग के लिए भी लोग फोन करके पूछ रहे हैं कि जाए या नहीं। हमने भी उन्हें वेट एंड वॉच का सजेशन दिया है। इस त्रासदी से हमारा बिजनेस काफी प्रभावित हुआ है। नेपाल की बुकिंग में 90% तक गिरावट आ गई है। जब तक वहां की स्थिति ठीक नहीं होगी कुछ कहा नहीं जा सकता।’ ‘हमें नेपाल के लिए दिसंबर तक की बुकिंग आ गई थी। मगर अभी 2 महीने के लिए बुकिंग कैंसिल हो गई है। अगर स्थिति सही नहीं रही तो आगे के महीने के लिए भी बुकिंग कैंसिल हो जाएगी।’ 40 और 60 लोगों के कॉरपोरेट ग्रुप ने रद्द की यात्रा टूरिज्म एसोसिएशन ऑफ बिहार के प्रेसिडेंट एसके सिंह ने कहा कि कई कॉरपोरेट समूह और परिवार अपनी यात्राएं रद्द कर चुके हैं। 30 अगस्त को पोखरा जाने वाली एक फैमिली ने अपनी ट्रिप कैंसिल कर दी। 31 अगस्त को नेपाल जाने वाले 40 लोगों के एक कॉरपोरेट ग्रुप ने यात्रा रद्द कर दी। 3-4 सितंबर को तीन कॉरपोरेट ग्रुप जाने वाले थे। इसमें 40, 60 और 90 लोगों के समूह ने अपना कार्यक्रम टाल दिया। ये पूरा सितंबर डिस्टर्ब हो गया है। अभी सिचुएशन देखकर लोग डर रहे हैं। नेपाल त्रासदी से हुआ 5 करोड़ का नुकसान एसके सिंह ने बताया, ‘सावन महीने में लोग पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन करने जाते थे। सितंबर में कई कॉरपोरेट ग्रुप की मीटिंग नेपाल में होती है। इस त्रासदी के बाद लोगों ने अपनी बुकिंग कैंसिल करके दूसरा डेस्टिनेशन चुन लिया है। एक कॉरपोरेट इवेंट के आयोजन में 8 से 10 लाख रुपए लगते हैं। इसमें होटल अकोमोडेशन, ट्रांसपोर्टेशन, खाना, कॉन्फ्रेंस प्रोग्राम सब कुछ शामिल होता है।’ 10 दिनों से कैब नेपाल नहीं गई भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा के संचालक संजीव कुमार ने बताया कि बाढ़ आने के बाद कई सड़कें गाड़ियों के चलने लायक नहीं रहीं। इसके कारण पहले से बुक टिकट भी रद्द करने पड़े। इंडो-नेपाल रूट पर कैब संचालकों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रक्सौल के कैब संचालक इरफान के अनुसार उनकी 10 एसयूवी पिछले करीब 10 दिनों से नेपाल नहीं गई है। सड़क खराब होने और यात्रियों में डर के कारण गाड़ियों का परिचालन प्रभावित हुआ है। काठमांडू घाटी जाने वाली हाईवे बह गई वाल्मीकिनगर के ट्रैवल एजेंट साकेत ने कहा, ‘शुरुआत में जो बाढ़ आई थी उसमें हाईवे बची थी, लेकिन अब काठमांडू हाईवे भी दो-तीन जगह से कट कर बह गई है। यह मेन हाईवे काठमांडू घाटी को पूरे नेपाल से जोड़ती है। इसे ठीक करने में टाइम लगेगा। पहाड़ काटकर सड़क बनाना होगा। बाढ़ की वजह से कई जगह से कनेक्टिविटी कट गई है। पिछले साल ऐसा नहीं था, बस कुछ जगह पर लैंड स्लाइड हुई थी। इस तरह की त्रासदी नहीं आई थी। बिहार बॉर्डर पर हमारी जीविका ही नेपाल के टूरिज्म से चलती थी। इंटरसिटी बसें भी नहीं चल रही हैं।- साकेत, ट्रैवल एजेंट पर्यटन क्षेत्र को नुकसान से बचाने के लिए हर प्रयास किए जाएंगे बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा, ‘कई लोग सीतामढ़ी के पुनौराधाम होते हुए नेपाल जाते थे। माता सीता की नगरी जनकपुर नेपाल में है। नेपाल की त्रासदी से बिहार के पर्यटन पर थोड़ा असर पड़ा है। हमारा क्षेत्र नेपाल से लगा हुआ है। सामान लेकर 3 दिन से बॉर्डर के पास खड़े हैं ट्रक नेपाल त्रासदी से इकोनॉमी में भी काफी असर पड़ा है। कोयला और दूसरे सामान लेकर ट्रक तीन दिन से सीमा पर खड़े हैं। ट्रक डाइवर रिजवान ने कहा, ‘मैं झारखंड से कोयला लेकर आया हूं। नेपाल के मिर्चाइया जाना है। अभी तक भंसार (नेपाल जाने के लिए लगने वाली कस्टम ड्यूटी) नहीं कटा है। बेंगलुरु से सामान लेकर नेपाल जा रहे संजय ने कहा, ‘अभी मैं बिहार के बॉर्डर पर रुका हुआ हूं। मुझे मार्बल के पत्थर जनकपुर डिलीवर करना है। 3 दिन से मेरी ट्रक एक ही जगह पर खड़ी है।’
बिहार से नेपाल जाने वाले 90% टूरिस्ट घटे, त्रासदी इंपैक्ट:काठमांडू-पोखरा के टूर कैंसिल करवा रहे लोग, पशुपतिनाथ के दर्शन करने भी नहीं जा रहे

