पूर्वी भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब धरातल पर उतरने वाली है। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए सर्वे टीम का गठन कर दिया है। हवाई और जमीनी सर्वे जुलाई से होगा। विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है। यह पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड होगा, जो उत्तरप्रदेश से बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल तक जाएगा। इस ट्रेन की रफ्तार 350 किमी प्रति घंटा होगी। पटना से वाराणसी का सफर महज 50 मिनट में पूरा होगा। वहीं, दिल्ली से आगरा की दूरी 58 मिनट और लखनऊ की दूरी 2 घंटे 12 मिनट में तय होगी। वाराणसी से पटना होते सिलिगुड़ी की दूरी मात्र 2 घंटे 55 मिनट में तय होगी। दिल्ली से आगरा @ 58 मिनट दिल्ली-आगरा : 58 मिनट दिल्ली-लखनऊ : 2 घंटे 12 मिनट दिल्ली-वाराणसी : 3 घंटे 33 मिनट दिल्ली-अयोध्या : 2 घंटे 47 मिनट लखनऊ-प्रयागराज : 48 मिनट लखनऊ-वाराणसी : 1 घंटे 21 मिनट लखनऊ-अयोध्या : 35 मिनट सर्वे में क्या होगा जमीन की ऊंचाई और ढलान
नदी, जंगल, आबादी और सड़क-रेल क्रॉसिंग
पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास आदि के लिए सही स्थल
भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण अध्ययन। चार राज्य जुड़ेंगे यह हाईस्पीड कॉरिडोर बिहार, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा। दिल्ली से वाराणसी के लिए अलग टिकट होगा। फिर वाराणसी से सिलिगुडी के लिए टिकट लेना पड़ेगा। करीब 100-150 किमी पर एक स्टेशन का निर्माण होगा। हाल ही में यूपी में आयोजित कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था-बुलेट ट्रेन मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के लिए किफायती रहेगी और विकसित भारत की नींव रखेगी।

