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‘बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में मिली बड़ी उपलब्धि…’, पालघर में MT-5 सुरंग बनने के बाद क्या बोले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव?

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भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट, ने महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि को पार कर लिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत पालघर जिले में पर्वतीय सुरंग (MT-5) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जिसे पूरे कॉरिडोर का सबसे जटिल और संवेदनशील खंड माना जाता है.

उन्होंने कहा कि पालघर, मुंबई महानगर क्षेत्र और गुजरात की ओर जाने वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर के बीच रणनीतिक प्रवेश द्वार है. यहां काम में देरी का सीधा असर पूरे प्रोजेक्ट टाइमलाइन पर पड़ता है. ऐसे में माउंटेन टनल का ब्रेकथ्रू यह साफ संकेत देता है कि मुंबई तक बुलेट ट्रेन लाने की दिशा में सबसे कठिन बाधा अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है.’

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल 8 पर्वतीय सुरंगे प्रस्तावित

508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल 8 पर्वतीय सुरंगें प्रस्तावित हैं, जिनमें से 7 महाराष्ट्र में स्थित हैं. रेल मंत्री ने कहा कि कठिन चट्टानी भूगर्भ, पहाड़ी ढलान, मानसून जलस्तर और पर्यावरणीय संवेदनशीलता इन सभी ने इस सेक्शन को तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था. उन्होंने कहा कि इस माउंटेन टनल का निर्माण ड्रिल-एंड-ब्लास्ट तकनीक से किया गया. मौके पर मौजूद इंजीनियरों के अनुसार, हर ब्लास्ट से पहले और बाद में चट्टानों की मजबूती, कंपन और सेफ्टी पैरामीटर्स की सख्त निगरानी की गई.

उन्होंने कहा कि टनल के दोनों छोर जुड़ते ही साइट पर काम कर रहे मजदूरों और इंजीनियरों में उत्साह साफ दिखाई दिया, क्योंकि यह सफलता बाकी टनलों के लिए रोडमैप और आत्मविश्वास दोनों लेकर आई है.

तकनीकी सफलता से बढ़ेगी रफ्तार

रेलवे और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस ब्रेकथ्रू के बाद बाकी माउंटेन टनलों की खुदाई में तेजी आएगी. वायाडक्ट और ट्रैक-बेड वर्क को बेहतर तालमेल मिलेगा. मुंबई कनेक्टिविटी से जुड़े काम को नई गति मिलेगी. सरल शब्दों में कहें तो, पालघर में पहाड़ पार होते ही प्रोजेक्ट की रफ्तार जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह बढ़ेगी.

फिलहाल, पालघर की पहाड़ियों के भीतर हुआ यह ब्रेकथ्रू बताता है कि बुलेट ट्रेन अब सिर्फ कागजों और पिलरों पर नहीं, बल्कि ठोस चट्टानों को पार करते हुए हकीकत की पटरी पर आगे बढ़ रही है.

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