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बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में एसडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, व्यवहार न्यायालय के न्यायाधीश, अधिवक्ता, न्यायालय कर्मी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़, आग लगने और विषैले सांपों के काटने जैसी आपात स्थितियों में बचाव एवं राहत कार्यों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में एसडीआरएफ के अधिकारियों ने वर्तमान बाढ़ के मौसम के मद्देनजर महत्वपूर्ण सावधानियां बताईं। उन्होंने सलाह दी कि बाढ़ की स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाएं। अनावश्यक रूप से बाढ़ के पानी में प्रवेश न करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों ने आपदा के समय अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की बात कही। अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित उपाय
बरसात के मौसम में निकलने वाले विषैले सांपों और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं से बचाव के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सांप के काटने पर झाड़-फूंक, टोने-टोटके या घरेलू उपचार पर भरोसा न करें। पीड़ित को शांत रखते हुए बिना समय गंवाए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। अग्निशमन विभाग की टीम ने आग लगने की स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों का प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने पर घबराने के बजाय संयम बनाए रखें, बिजली की आपूर्ति बंद करें, सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलें। यदि आग शुरुआती स्तर पर हो, तो उपलब्ध अग्निशामक यंत्रों की सहायता से उसे नियंत्रित करने का प्रयास करें। तत्काल अग्निशमन विभाग और अन्य आपातकालीन सेवाओं को सूचना देने की प्रक्रिया भी समझाई गई। अधिकारियों ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य लोगों को आपदा के समय सही निर्णय लेने, सामूहिक सहयोग की भावना विकसित करने और त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए तैयार करना है। उन्होंने जोर दिया कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर उठाए गए सही कदम किसी भी आपदा में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।


