
मुख्य बातें
Suvendu Adhikari : कोलकाता: मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पर गए. वहां से लौटते ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस को लेकर एक बड़ी घोषणा कर दी. उन्होंने कहा-हमारा भाग्य बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं जैसा होता. एक समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस नेताओं से कहा था-आपने देश को विभाजित किया और मैंने पाकिस्तान को विभाजित किया. इसी तरह पश्चिम बंगाल का निर्माण हुआ. मैं मंत्रिमंडल की बैठक और विधानसभा में पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस का मुद्दा जरूर उठाऊंगा. पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस 20 जून, 1947 को होना चाहिए. यह मेरे मन में है. इतिहास को बदला नहीं जा सकता.
क्या है स्थापना दिवस को लेकर विवाद
20 जून 1947 को, अविभाजित बंगाल की प्रांतीय विधायिका (बंगाल विधान परिषद) में बंगाल के विभाजन का मुद्दा उठाया गया. भारी बहुमत ने बंगाल के विभाजन के पक्ष में मतदान किया. परिणाम स्वरूप, बंगाल का विभाजन हो गया. इस मतदान के फलस्वरूप, पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बन गया और पूर्वी बंगाल तत्कालीन पाकिस्तान में शामिल हो गया. बंगाल के इस विभाजन के दो महीने के भीतर ही भारत ब्रिटिश गुलामी से मुक्त हो गया. इसलिए, 20 जून के उस निर्णय को ध्यान में रखते हुए, भाजपा ने पश्चिम बंगाल दिवस की मांग की. चूंकि 1947 में इसी दिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पहल पर बंगाल विधानसभा ने पश्चिम बंगाल को भारत का एक राज्य घोषित करने के पक्ष में मतदान किया था, इसलिए भाजपा ने इसे ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के रूप में घोषित किया.
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अब तक पोयाला बैशाख को मनाया जाता है
भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भी 20 जून को पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस के रूप में मनाया. लोक भवन (पूर्व में राज भवन) में भी 20 जून को पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है. हालांकि, उस समय की तृणमूल सरकार केंद्र के इस फैसले को स्वीकार नहीं कर सकी. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर तृणमूल सरकार ने विधानसभा में पोयाला बैशाख को ‘बांग्ला दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया. अब, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, नए मुख्यमंत्री सुभेंदु ने पश्चिम बंगाल दिवस को लेकर एक बड़ी घोषणा की है.
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