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महाअष्टमी के पावन अवसर पर भागलपुर में मां दुर्गा की भक्ति का माहौल दिखा। सुबह से ही मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हाथों में पूजा की थाली, नारियल और चुनरी लिए भक्त मां के दर्शन को पहुंचे। खासकर सुहागिन महिलाएं मां को खोइछा चढ़ाने और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना लेकर आई थीं। मंदिरों में मां के जयकारे गूंज रहे थे। भक्तों की आंखों में आस्था और मन में विश्वास साफ दिख रहा था। उन्होंने परिवार की खुशहाली और विपत्तियों को दूर करने के लिए मां से प्रार्थना की। सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से खोइछा भरने की रस्म निभाई। यह मां के प्रति उनके प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक था, जिसमें सुहाग और संतान की मंगल कामनाएं समाई थीं। किसी ने पति की लंबी उम्र, तो किसी ने बच्चों के स्वास्थ्य के लिए की प्रार्थना खोइछा भरते समय किसी के मन में पति की लंबी उम्र की कामना थी, तो कोई अपने बच्चों के स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए प्रार्थना कर रही थी। किसी ने परिवार की तरक्की मांगी, तो किसी ने घर में हमेशा सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की मन्नत मांगी। मां के दरबार में पहुंचीं महिलाओं के लिए हर अर्पित फूल, हर जलता दीपक और हर प्रार्थना अपने आराध्य के प्रति समर्पण की अभिव्यक्ति बन गई।
मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों की पुकार सुनती हैं और उन्हें कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देती हैं। इसी विश्वास के सहारे श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं। महाअष्टमी पर भी भक्तों के मन में यही भाव था कि मां जगदंबे की कृपा उनके परिवार पर बनी रहे और जीवन में आने वाली हर बाधा दूर हो। मां, मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखना.. माता के दरबार में पहुंचीं महिलाओं की प्रार्थनाओं में कहीं ममता थी, कहीं विश्वास, तो कहीं अपने परिवार के लिए अनकही चिंताएं। कोई अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए मां के सामने शीश झुका रही थी, तो कोई परिवार के हर सदस्य की सलामती की कामना कर रही थी। श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो हर भक्त मां से अपने मन की बात कह रहा हो। महाअष्टमी पर मां के समक्ष नारियल चढ़ाने, खोइछा भरने और पूजा-अर्चना करने की परंपरा ने मंदिरों के वातावरण को और भी भावपूर्ण बना दिया। महिलाओं के बीच पूजा-पद्धति, पारिवारिक संस्कारों और बच्चों से जुड़ी रस्मों को लेकर भी बातचीत होती रही। इसी क्रम में एक महिला श्रद्धालु ने बच्चे के मुंडन के बाद छठी की रस्म और इस अवसर पर मिलने वाले नेग का जिक्र किया। बातचीत में इस बात पर भी चर्चा हुई कि बच्चे की छठी किस तरह मनाई जाती है और परिवार में इस अवसर पर कौन-कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं। धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक संस्कारों की यह झलक भी महाअष्टमी के उत्सवी माहौल का हिस्सा बनी। मां के दरबार में पूजा करने आई महिलाओं के बीच श्रद्धा के साथ-साथ परिवार, बच्चों और रिश्तों से जुड़ी भावनाएं भी सहज रूप से सामने आती रहीं। मां जगदंबे से मांगा सबके लिए मंगल आशीर्वाद महाअष्टमी के पावन अवसर पर मयंक कुमारी ने अंग प्रदेश की पवित्र धरती से मां जगदंबे के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कामना की कि मां दुर्गा की कृपा सदैव सभी भक्तों पर बनी रहे और हर घर में सुख, शांति, समृद्धि तथा खुशहाली का वास हो। उन्होंने बताया कि अष्टमी के दिन श्रद्धालु मां के सामने नारियल अर्पित करते हैं, खोइछा भरते हैं और अपने सुहाग तथा बच्चों की मंगलकामना करते हैं। मां के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी के जीवन में खुशहाली और परिवारों की सलामती की कामना की। उनकी भावनाओं में मां के प्रति वही अटूट विश्वास झलकता है, जो पीढ़ियों से भारतीय परिवारों की धार्मिक परंपराओं का हिस्सा रहा है। भक्तों के लिए मां दुर्गा केवल शक्ति की प्रतीक नहीं, बल्कि संकट के समय संबल देने वाली, दुखों को सहने की शक्ति प्रदान करने वाली और मन में आशा जगाने वाली आराध्य देवी भी हैं। हर ओर मां की महिमा, हर हृदय में भक्ति महाअष्टमी पर भागलपुर के मंदिरों और पूजा पंडालों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने नवरात्र के उत्साह को नई ऊंचाई दी। मंदिरों में पूजा-अर्चना और आरती के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहा। मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं के चेहरे पर उत्साह और मन में अपार श्रद्धा दिखाई दे रही थी। कहीं भक्त मां के चरणों में फूल अर्पित कर रहे थे, तो कहीं महिलाएं हाथ जोड़कर आंखें बंद किए अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर रही थीं। हर किसी की अपनी मनोकामना थी, लेकिन मां के दरबार में सभी की आस्था एक ही भाव में समाहित दिखाई दी—मां का आशीर्वाद बना रहे और जीवन में सुख-शांति कायम रहे।
