
Bhagalpur Fake Teacher Scam: बिहार के भागलपुर में शिक्षा विभाग के भीतर फर्जी शिक्षिका के नाम पर सरकारी राशि के भुगतान का मामला गंभीर होता जा रहा है. आरोप है कि एक ऐसी शिक्षिका के नाम पर एचआरएमएस पोर्टल पर पहचान और रिकॉर्ड तैयार किये गये, जिसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं. इसके बाद वेतन और एरियर के नाम पर सरकारी राशि का भुगतान कराने की बात सामने आयी है.
मामले में जोगसर थाने में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. पुलिस ने संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में लिया है, जबकि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) शशि चंद चौधरी से भी पूछताछ की जा रही है.
मामले में करीब 98 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की बात सामने आयी है. विभागीय स्तर पर सामने आयी जानकारी के अनुसार, इसमें 52 लाख रुपये की निकासी हुई, जबकि 46 लाख रुपये होल्ड कर दिये गये. इसके अलावा 72 लाख रुपये की निकासी की कोशिश किये जाने की बात भी कही गयी है. अलग-अलग राशियों और लेनदेन के विवरण के कारण वास्तविक वित्तीय अनियमितता की कुल राशि अभी स्पष्ट नहीं है. पुलिस और प्रशासन बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं.
एचआरएमएस पोर्टल पर कैसे बनी फर्जी पहचान, जांच का केंद्र यही सवाल
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि तनुश्री नाम से कथित फर्जी पहचान और रिकॉर्ड किस तरह तैयार किये गये और उनके आधार पर वेतन व एरियर के भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी. जांच में फर्जी पीआरएएन नंबर और बैंक खाते के इस्तेमाल की आशंका भी सामने आयी है.
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पोर्टल पर रिकॉर्ड तैयार करने, कर्मचारी की पहचान दर्ज करने और भुगतान की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही. डिजिटल साक्ष्यों के साथ बैंक खातों और विभागीय अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है. जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.
शुक्रवार को क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता जोगसर थाने पहुंचे और पुलिस पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और पुलिस जांच कर रही है. शिक्षा विभाग की ओर से भी अलग से विभागीय जांच कराये जाने की बात कही गयी है.
52 लाख की निकासी, 46 लाख होल्ड होने की बात
शिक्षा विभाग में चर्चा है कि सुल्तानगंज स्थित एक मध्य विद्यालय की कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर वेतन निकासी की जा रही थी. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 98 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़ी अनियमितता की आशंका है. इनमें 52 लाख रुपये की निकासी होने और 46 लाख रुपये होल्ड किये जाने की बात कही गयी है.
इसके साथ ही 72 लाख रुपये की निकासी की कोशिश का भी उल्लेख किया गया है. इन आंकड़ों का आपसी संबंध और वास्तविक वित्तीय नुकसान अभी जांच का विषय है. इसलिए फिलहाल 98 लाख रुपये को संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी राशि के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी रकम को प्रमाणित घोटाले की राशि मानकर.
एसडीपीओ-1 हेमंत सिंह के अनुसार, मामले से संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
उच्चवर्गीय लिपिक शिशिर कुमार झा निलंबित, चार अन्य भी जांच के दायरे में
इस मामले में विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो गयी है. शुक्रवार को उच्चवर्गीय लिपिक शिशिर कुमार झा को निलंबित कर दिया गया. क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, भागलपुर प्रमंडल की ओर से निलंबन का आदेश जारी किया गया है. आरोप है कि फर्जी शिक्षिका के नाम पर गलत तरीके से वेतन भुगतान की प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता हुई.
निलंबन अवधि में शिशिर कुमार झा को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, बांका में ड्यूटी करनी होगी. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह फिलहाल फरार बताये जा रहे हैं और उनका कार्यालय बंद है. फाइलें और अन्य कागजात नहीं मिलने से जांच में बाधा आने की बात भी सामने आयी है.
विभागीय स्तर पर कार्यालय के कमरे की इन्वेंटरी तैयार कर ताला खुलवाने और कंप्यूटर, फाइलों तथा अन्य अभिलेखों की जांच करने की योजना है. इन दस्तावेजों से भुगतान की प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का पता लगाने में मदद मिल सकती है.
इससे पहले डाटा इंट्री ऑपरेटर अविनाश राज को शिक्षा विभाग से बर्खास्त किये जाने की जानकारी भी सामने आयी थी. डीईओ, डीपीओ, तनुजा देवी और अविनाश राज की पत्नी काजल कुमारी समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की बात कही गयी है. हालांकि, सभी संबंधित लोगों के खिलाफ आरोपों की स्थिति और उनकी व्यक्तिगत भूमिका जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी.
डीएम की तीन सदस्यीय टीम ने डीईओ कार्यालय में खंगाले रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है. उप विकास आयुक्त रवि राकेश कुमार के नेतृत्व में टीम में ट्रेजरी ऑफिसर नवलकिशोर यादव और जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार शामिल हैं.
शुक्रवार को दोपहर 12:01 बजे टीम जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंची और वहां उपलब्ध अभिलेखों की जांच की. टीम ने वेतन भुगतान से जुड़ी फाइलें मंगवायीं और यह समझने की कोशिश की कि कर्मचारी की कथित पहचान किस तरह तैयार की गयी, पोर्टल पर आइडी कैसे बनी और भुगतान की प्रक्रिया में कहां चूक हुई.
उप विकास आयुक्त रवि राकेश कुमार ने बताया कि जांच के दौरान आइडी बनाने की प्रक्रिया और अन्य संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है. देर शाम तक जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार समेत अन्य अधिकारियों के साथ जांच जारी रही.
जांच टीम वेतन भुगतान और वित्तीय अनियमितता से जुड़े दस्तावेजों का अलग-अलग पहलुओं से मिलान कर रही है. जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जायेगी. इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जा सकती है.
Bhagalpur Fake Teacher Scam: सरकारी भुगतान व्यवस्था पर उठे सवाल, अब जवाबदेही तय करने की चुनौती
फर्जी पहचान के आधार पर सरकारी भुगतान होने की आशंका ने शिक्षा विभाग की कर्मचारी सत्यापन और वेतन भुगतान व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि पहचान और बैंक विवरण के सत्यापन में कौन-सी प्रक्रियाएं अपनायी गयीं और कथित अनियमितता को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका.
मामले का असर केवल सरकारी राशि तक सीमित नहीं है. ऐसी घटनाएं विभागीय रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाती हैं. इसलिए पुलिस जांच के साथ विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करना और भुगतान प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान करना भी महत्वपूर्ण होगा.
फिलहाल छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी, एक कंप्यूटर ऑपरेटर को हिरासत में लिये जाने, डीपीओ से पूछताछ और उच्चवर्गीय लिपिक के निलंबन के बीच जांच आगे बढ़ रही है. बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और विभागीय फाइलों की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी पहचान किसने तैयार की, भुगतान की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था और सरकारी राशि के मामले में वास्तविक अनियमितता कितनी हुई.
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