Sunday, April 26, 2026

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भाजपा नए चेहरों को लाने में जुटी, कांग्रेस-झामुमो आ सकते हैं साथ


रांची नगर निगम का चुनाव परिणाम एक ही दिन में आ गया है। शहर की सरकार मिल गई है। लेकिन अभी तक कोरम अधूरा है, क्योंकि अब रांची का डिप्टी मेयर कौन बनेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। होली के बाद मेयर और पार्षदों का शपथ ग्रहण होगा। उसी दिन डिप्टी मेयर का चुनाव भी होगा। डिप्टी मेयर बनने की रेस में कई दावेदार हैं। लेकिन इस बार डिप्टी मेयर की कुर्सी काफी महंगी हो गई है। क्योंकि, पिछले दो चुनाव में जिस तरह वार्डों में भाजपा नेताओं का दबदबा था, वह किला इस बार ध्वस्त हो गया है। पिछली बार 53 में 27 से वार्डों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते थे। लेकिन इस बार इनकी संख्या 16 पर सिमट गई है। मतलब भाजपा के कोटे में 11 पार्षद कम हो गए हैं। इस चुनाव में कांग्रेस से जुड़े सबसे अधिक 18 नेता पार्षद बने हैं। वहीं, झामुमो से जुड़े 7, राजद से जुड़े 3 और 9 नए चेहरे जीतकर आए हैं। इसलिए भाजपा के लिए सीधे तौर पर डिप्टी मेयर की कुर्सी हासिल करना बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में भाजपा ने 9 नए चेहरों को अपने पाले में करने के लिए पासा फेंक दिया है। नए चेहरों से संपर्क साधा जा रहा है। क्योंकि, भाजपा से जुड़े वार्ड 1 से तीसरी बार पार्षद बने नकुल तिर्की और वार्ड 20 से जीते सुनील यादव दावेदारी कर रहे हैं। इसी बीच वार्ड 27 से जीतने वाली बबली सोनी को भाजपा अपने पाले में लाने में जुट गई है। क्योंकि, डिप्टी मेयर के लिए सोनी भी मजबूती से दावेदारी कर रही हैं। इधर, कांग्रेस से जुड़ी वार्ड 18 की पार्षद आशा देवी डिप्टी मेयर का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। तीसरी बार लगातार जीत दर्ज की है। वहीं, झामुमो से वार्ड 21 से मो. एहतेशाम चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। पार्षदों में बिखराव नहीं हो, इसलिए कांग्रेस- झामुमो एक साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। वहीं, वार्ड 22 के पार्षद मो. असलम और वार्ड 17 के पार्षद मो. सलाउद्दीन भी डिप्टी मेयर चुनाव लड़ेंगे। गैर आदिवासी के बनने की संभावना, अल्पसंख्यक भी दावेदार
डिप्टी मेयर की कुर्सी पर गैर आदिवासी पुरुष पार्षद को बैठाने का समीकरण तैयार किया जा रहा है। क्योंकि, मेयर की कुर्सी आदिवासी महिला के पास चली गई है। इसलिए कांग्रेस-झामुमो किसी अल्पसंख्यक पुरुष पार्षद को चुनाव में उतार सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस कोटे से महिला पार्षद को डिप्टी मेयर बनाने के लिए लॉबिंग तेज हो गई है। दूसरी ओर वार्ड 22 से मो. असलम और वार्ड 17 से मो. सलाउद्दीन भी अपनी दावेदारी मजबूत किए हुए हैं। इन दावेदारों की मजबूती की वजह… नकुल तिर्की : वार्ड एक से तीन बार पार्षद रहे। एक बार इनकी प|ी पार्षद रहीं। भाजपा से जुड़े हैं। क्षेत्र में अच्छी पकड़ और अनुभव है। लेकिन 25 पार्षदों का जुगाड़ करना चुनौती होगी। सुनील यादव : वार्ड 20 से तीन बार पार्षद बने। एक बार इनकी प|ी पार्षद रही हैं। अपर बाजार जैसे क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। भाजपा से जुड़े हैं। पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए दावेदारी कर रहे हैं। बबली सोनी : किसी पार्टी से नहीं जुड़ी हैं, लेकिन भाजपा नेता का समर्थन है। भाजपा में शामिल करने की कवायद चल रही है। महिला पार्षदों में मजबूत दावेदार हैं। क्योंकि, कई पार्षदों को मैनेज करने में भाजपा नेता लगे हुए हैं। आशा देवी : वार्ड 18 से सबसे अधिक पैसा खर्च करने वाली प्रत्याशी सोमवित माजी को पटखनी दी है। तीसरी बार पार्षद बनी है। भाई राजेश गुप्ता छोटू कांग्रेस के पुराने और पकड़ वाले नेता हैं। इसलिए कांग्रेस का समर्थन मिल सकता है। मो. एहतेशाम : वार्ड 21 से तीसरी बार पार्षद बने। एक बार इनकी प|ी पार्षद रही हैं। झामुमो से जुड़े। सभी क्षेत्रों में अच्छी पकड़ है। पार्टी का भी सपोर्ट है। ऐसे में मजबूत दावेदार हो सकते हैं। मो. असलम : वार्ड 22 से लगातार तीसरी बार पार्षद बने। एक बार इनकी प|ी पार्षद बनी थीं। रांची में सबसे अधिक 5226 वोट से जीते हैं। रांची की अच्छी समझ है। जनता के मुद्दे को लेकर अफसरों को घेरने के लिए जाने जाते हैं। इसलिए दावेदारी मजबूत है। मो. सलाउद्दीन : वार्ड 17 से चुनाव जीते हैं। इनकी प|ी भी वार्ड 16 से पार्षद बनी हैं। क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। निगम बोर्ड की बैठक में जनता के मुद्दे पर मुखर रहे हैं। इसलिए दावेदारी मजबूत है। पार्षद अब चुनाव का खर्च निकालने में जुटे, वारा-न्यारा शुरू डिप्टी मेयर की कुर्सी का सपना देखने वाले पार्षदों के लिए अपने पाले में 25 पार्षदों को लाना बड़ी चुनौती बन गई है। क्योंिक, अब पार्षद इसी बहाने चुनाव में हुए खर्च निकालने का जुगाड़ लगाने में लग गए हैं। चुनाव में जीत दर्ज करने वाले कई पार्षदों ने निर्धारित राशि पांच लाख रुपए से अधिक खर्च की है। इससे उनका बजट बिगड़ गया है। लेकिन डिप्टी मेयर का चुनाव उनके लिए वरदान बन गया है। डिप्टी मेयर का चुनाव लड़ने वाले संभावित पार्षद सबसे पहले मित्रता- परिचय के आधार पर पार्षद जोड़ रहे हैं। इसके साथ खर्च का वहन करने का वादा भी कर रहे हैं। शनिवार देर रात तक पार्षदों की घेराबंदी के लिए कई स्तर पर बैठकों का दौर जारी था। अब राजनीतिक दल भी डिप्टी मेयर का चुनाव कराने में जुटेगी।

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