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मधुबनी के मिथिला चित्रकला संस्थान के बहुउद्देशीय सभागार में बुधवार शाम विश्व कला दिवस पर पद्मश्री सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसका उद्देश्य मिथिला चित्रकला के कलाकारों को सम्मानित करना और इस कला को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी मधुबनी आनंद शर्मा, संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’, अनादी फाउंडेशन, दरभंगा के निदेशक प्रदीप कांत चौधरी, मिथिला आर्ट इंस्टीट्यूट के कौशिक कुमार झा और सुप्रसिद्ध वक्ता श्रीमती माला झा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। परिजनों को पारंपरिक पाग-डोपटा एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया जिला पदाधिकारी ने मिथिला चित्रकला के पद्मश्री सम्मानित कलाकारों और उनके परिजनों को पारंपरिक पाग-डोपटा एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मधुबनी के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां नौ पद्मश्री कलाकारों की समृद्ध परंपरा रही है। डीएम ने घोषणा की कि मिथिला चित्रकला के प्रचार-प्रसार और कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक ऑनलाइन ई-पोर्टल अपने अंतिम चरण में है। इस पोर्टल के माध्यम से कलाकारों को उनकी कलाकृतियों की बिक्री का 80 प्रतिशत सीधे उनके खाते में प्राप्त होगा, जबकि शेष राशि ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग पर खर्च की जाएगी। मिथिला चित्रकला केवल कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत स्वरूप संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने कहा कि मिथिला चित्रकला केवल कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने बताया कि यह संस्थान कला के संरक्षण, शोध, अभिलेखन एवं प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र है, जो लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री कलाकारों के परिजनों ने अपने प्रियजनों को याद करते हुए उनके संघर्ष, साधना एवं उपलब्धियों को साझा किया। इन प्रेरणादायक वक्तव्यों ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। शुरुआत 15 अप्रैल 2012 को हुई थी अनादी फाउंडेशन, दरभंगा के निदेशक प्रदीप कांत चौधरी ने विश्व कला दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत 15 अप्रैल 2012 को हुई थी और वर्ष 2019 में यूनेस्को द्वारा इसे आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई। यह दिवस महान कलाकार लियोनार्दो द विंची के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कार्यक्रम का संचालन प्रथम चरण में डॉ. रानी झा एवं द्वितीय चरण में श्री प्रतीक प्रभाकर द्वारा किया गया। इस सफल आयोजन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह प्रभारी उप-निदेशक नीतीश कुमार, लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद यादव सहित संस्थान के शिक्षकों, कर्मियों एवं अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

