![]()
मधुबनी के सप्ता स्थित रीजनल सेकेंडरी स्कूल में बुधवार को 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के लिए जिला स्तरीय दिशा-निर्देशन कार्यशाला आयोजित की गई। पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू हुई इस कार्यशाला का मुख्य विषय “निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार” था। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और शोध की भावना को विकसित करना है। कार्यशाला का उद्घाटन मधुबनी नगर निगम के नगर आयुक्त उमेश कुमार भारती, रीजनल सेकेंडरी स्कूल के निदेशक आर. एस. पांडे, प्राचार्य मनोज झा और प्रोफेसर कुंवर जी राउत सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों का मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार पाग, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों, स्रोत व्यक्तियों और प्रतिभागियों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की रूपरेखा समझाई गई। उन्हें विषय चयन, परियोजना निर्माण, वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रक्रिया और विद्यार्थियों को नवाचार आधारित परियोजनाओं के लिए प्रेरित करने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि यह कांग्रेस बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने का एक प्रभावी मंच है। नगर आयुक्त उमेश कुमार भारती ने कहा कि विज्ञान और नवाचार वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और उन्हें समाज एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर शोध के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। रीजनल सेकेंडरी स्कूल के निदेशक आर. एस. पांडे ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों और विद्यार्थियों को नई दिशा देती हैं तथा शोध आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती हैं। प्रोफेसर कुंवर जी राउत ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस बच्चों की रचनात्मक क्षमता को निखारने का एक सशक्त माध्यम है। यह उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और नवाचार की भावना विकसित करती है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विषय की विस्तृत जानकारी देने के साथ-साथ भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।


