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मधेपुरा में 14 एसआई और एएसआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मामलों की जांच में लापरवाही बरतने और सालों तक केस लंबित रखने का आरोप है। सिंहेश्वर थाने में 2015 से 2024 के बीच दर्ज 21 गंभीर मामलों की जांच पूरी न करने और ट्रांसफर के बाद भी केस का चार्ज दूसरे अधिकारी को न सौंपने के आरोप में यह कार्रवाई हुई है। जिन मामलों में लापरवाही बरती गई है, उनमें हत्या, जानलेवा हमला, मारपीट, शराबबंदी और बिजली अधिनियम से जुड़े केस शामिल हैं। सिंहेश्वर थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने यह एफआईआर दर्ज कराई है और मामले को सीजेएम कोर्ट में भेजा है। कई पुलिस अधिकारी दूसरे जिलों में तैनात विभागीय जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन में सामने आया कि ट्रांसफर होने के बाद भी कई केस की डायरी और जांच से जुड़े दस्तावेज संबंधित जांच अधिकारियों के पास ही पड़े रहे। विभाग की तरफ से बार-बार निर्देश और लेटर भेजे जाने के बावजूद उन्होंने केस का चार्ज ट्रांसफर नहीं किया। एफआईआर में जिन 14 पुलिस अधिकारियों के नाम हैं, उनमें से कई अभी दूसरे जिलों में तैनात हैं, जबकि कुछ रिटायर हो चुके हैं। इनमें दरभंगा में सर्किल इंस्पेक्टर एसआई रामेश्वर साफी, सहरसा के पस्तपार थानाध्यक्ष एसआई विजय पासवान, पटना पुलिस लाइन में तैनात एएसआई रणवीर कुमार और अररिया में तैनात एसआई राजेश कुमार सिंह शामिल हैं। सालों से पेंडिंग केस की हुई थी रिव्यु इनके अलावा एसआई रणवीर कुमार राजत, एसआई शंभू कुमार, एसआई मदन चौधरी, एसआई मनोज राम और एएसआई कृष्ण कुमार सिंह, सुबोध रजक, रामनिवास चौधरी, विनोद कुमार, अनिल कुमार और अमरेंद्र कुमार सिन्हा के नाम भी एफआईआर में दर्ज हैं। लंबे समय से लंबित इन सभी 21 मामलों की जांच और निपटारे की जिम्मेदारी अब एसआई रौशन कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लंबित मामलों की समीक्षा करके उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एएसपी (मुख्यालय) नेसार अहमद साह ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एसपी की मासिक क्राइम मीटिंग में सालों से लंबित मामलों की समीक्षा की गई थी। फरवरी 2025 में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई इस दौरान जांच में लापरवाही और केस का चार्ज न सौंपने का मामला सामने आया। कोसी रेंज के डीआईजी कुमार आशीष ने कहा कि आम लोगों को समय पर न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिकता है। पुराने और गंभीर मामलों के त्वरित अनुसंधान को लेकर मुख्यालय से स्पष्ट निर्देश हैं। अनुसंधान में शिथिलता या केस लंबित रखने की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मधेपुरा में लंबित अनुसंधान को लेकर इससे पहले फरवरी 2025 में भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार ने हत्या, शराब समेत 21 मामलों का प्रभार नहीं सौंपने और अनुसंधान लंबित रखने के आरोप में 31 दारोगाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब सिंहेश्वर थाने में 14 एसआई-एएसआई पर कार्रवाई से लंबे समय से लंबित मामलों के अनुसंधान को लेकर पुलिस महकमे में फिर से हलचल बढ़ गई है।
मधेपुरा में 14 पुलिसकर्मियों पर FIR:2015 से 2024 तक 21 गंभीर केस दबाकर रखा, ट्रांसफर के बाद भी प्रभार नहीं सौंपने का आरोप
