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भास्कर न्यूज | केतार प्रखंड के बेलाबार गांव की बदहाल सड़क ने एक बार फिर परेशानी बढ़ा दी। गांव के पूर्बरा टोला में गुरुवार को मरीज लेकर मुख्यालय जा रहा वाहन कीचड़ में फंस गया। वाहन निकालने के लिए ग्रामीणों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। कुदाल से मिट्टी हटाई गई। तब जाकर वाहन बाहर निकल सका। वाहन चालक ने बताया कि वह अनजाने में इसी रास्ते से गांव पहुंच गया। सड़क पर इतना कीचड़ था कि कई बार वाहन का संतुलन बिगड़ा। पलटने का डर लगा। काफी देर प्रयास के बाद वाहन निकला। ग्रामीण जाबिद अंसारी, गुलामुद्दीन अंसारी, जहूर अंसारी, नियाजुद्दीन अंसारी, मुस्तकीम अंसारी, विक्रमा लोहार समेत अन्य लोगों ने बताया कि गांव में किसी की तबीयत बिगड़ने पर वाहन चालक अक्सर सड़क की बदहाली बताकर आने से इनकार कर देते हैं। गढ़वा| बेलाबार के पूरबरा टोला की यह सड़क दक्षिण दिशा में मायर गांव, जबकि उत्तर और पश्चिम दिशा में प्रखंड मुख्यालय केतार को जोड़ती है। इस मार्ग से प्रतिदिन मायर, मुकुंदपुर और बेलाबार सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों का आवागमन होता है। इसकी लंबाई तीन किमी है। इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही ये आश्वासन भी अधूरे रह जाते हैं। नतीजतन, आज भी लोग जर्जर और कच्चे रास्ते पर आवागमन करते हैं। मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की हालत का असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। इसी कीचड़ वाली सड़क से हर दिन बच्चे स्कूल जाते हैं। बुजुर्गों को फिसलने का डर रहता है। दूसरे गांवों के लोग सड़क देखकर रिश्तेदारी, शादी-विवाह से भी कतराने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बेलाबार की यह सड़क वर्षों से खराब है। इसे दुरुस्त कराने के लिए किसी जनप्रतिनिधि ने गंभीर पहल नहीं की। ग्रामीणों ने कहा कि इसी प्रखंड के निवासी रहे पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही के कार्यकाल में भी सड़क उपेक्षित रही। वह तीन बार विधायक रहे। वर्षों तक प्रतिनिधित्व के बाद भी गांव को बुनियादी सड़क सुविधा नहीं मिली। 2024 के विधानसभा चुनाव में कई प्रत्याशियों ने सड़क निर्माण का वादा किया था। वर्तमान विधायक अनंत प्रताप देव छोटे राजा ने भी प्राथमिकता के आधार पर सड़क बनवाने की घोषणा की थी। चुनाव के लगभग दो वर्ष बाद भी तस्वीर नहीं बदली। हर बारिश में सड़क दलदल बन जाती है। आवागमन मुश्किल हो जाता है।

