
पश्चिम बंगाल में 15 साल तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है. बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. मामला नदिया जिले का है, जिसमें कथित तौर पर महुआ मोइत्रा को देर रात सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया था.
सर्किट हाउस से बाहर निकालने का आरोप
महुआ मोइत्रा ने याचिका में आरोप लगाया है कि नदिया में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें सर्किट हाउस से बाहर निकाल दिया, जबकि राज्य सरकार के स्वामित्व वाली इस संपत्ति में उनके लिए एक कमरा आवंटित किया गया था.
एक सप्ताह में जवाब दे बंगाल सरकार : सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष राज्य सरकार और केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह याचिका पर जवाब दाखिल करेंगे. पीठ ने कहा कि जवाब एक सप्ताह के भीतर दाखिल किरें. इसके बाद याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल कर सकती हैं. पीठ ने कहा कि उसके बाद मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जायेगा.
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14 अगस्त की रात की है घटना
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने 14 अगस्त की रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया था कि सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गये. उन्होंने सर्किट हाउस से निकलने से मना कर दिया, तो बाहर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाये गये.
लोकसभा अध्यक्ष से महुआ ने की थी हस्तक्षेप की अपील
कृष्णनगर की लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था. महुआ ने कहा था कि नदिया जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सर्किट हाउस खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा था.
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