
पश्चिम बंगाल की कृष्णनगर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और नदिया जिला प्रशासन के बीच चल रहे सर्किट हाउस विवाद में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने शुक्रवार को अहम निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा से कहा कि वह नदिया जिले के अपने किसी भी प्रस्तावित दौरे से एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित कर दें, ताकि अधिकारी प्रोटोकॉल के मुताबिक उनके ठहरने और सुरक्षा की जरूरी व्यवस्था कर सकें.
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें नदिया जिला प्रशासन के 1 सितंबर के विवादित सर्कुलर को चुनौती दी गयी थी.
ऐसा विषय नहीं, जिसे कोर्ट तक लाया जाये : सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह ऐसा विषय नहीं है, जिसे अदालत के दरवाजे तक लाया जाये. इसके लिए केवल एक सामान्य मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) का पालन किया जाना चाहिए.
तुषार मेहता ने रखा प्रशासन का पक्ष
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि किसी भी अधिकारी ने सांसद मोइत्रा से कमरा खाली करने को नहीं कहा था. नदिया प्रशासन का 1 सितंबर वाला विवादित परिपत्र (सर्कुलर) लागू नहीं किया जायेगा.
महुआ के वकील ने लगाया सांसद को परेशान करने का आरोप
महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि नदिया जिला प्रशासन का परिपत्र विशेष रूप से सांसद को परेशान करने के इरादे से जारी किया गया था. उन्होंने याद दिलाया कि प्रोटोकॉल सूची में एक सांसद का दर्जा राज्य के मुख्य सचिव से भी ऊपर होता है.
क्या था पूरा विवाद?
सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि अगस्त में नदिया जिला प्रशासन ने उन्हें सर्किट हाउस से बाहर निकालने की कोशिश की थी, जबकि उन्हें नियमानुसार कमरा आवंटित किया गया था. मोइत्रा का दावा था कि 14 अगस्त की रात जब उन्होंने कमरा छोड़ने से मना कर दिया, तो कैंपस के बाहर भीड़ जमा हो गयी और नारेबाजी की. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी इसकी शिकायत की थी.
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