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समस्तीपुर-सहरसा रेलखंड के मानसी- सहरसा 44.40 किलोमीटर दोहरीकरण काम की मंजूरी के साथ ही रेलवे मंडल प्रशासन ने टेंडर की कवायद शुरू कर दी है। इसके साथ इस खंड पर बहुत जल्द काम शुरू होने की उम्मीद जग गई है। सब ठीक ठाक रहा तो आने वाले दिसंबर महीने से दोहरीकरण का काम शूरू हो सकता है। दोहरीकरण के लिए तीन सालों का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना पर रेलवे 499 करोड़ रुपए खर्च करेगी। हालांकि यह राशि महंगाई के साथ बढ़ सकती है। डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने इस योजना की स्वीकृति प्रदान कर दी है। काम की जिम्मेवारी रेलवे के निर्माण विभाग को सौंपा गया है। निर्माण विभाग की ओर से इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कोसी नदी समेत आठ बड़े पुलों का होगा निर्माण डीआरएम ने बताया कि इस योजना के तहत कोसी नदी के साथ ही कोपरिया-धमारा के बीच 4, धमारा -बदला और बदला- मानसी के बीच दो-दो बड़े पुलों का निर्माण किया जाना है। इसके अलावा 44.40 किलोमीटर में रेलवे लाइन बिछाने का काम होगा। कोसी और बागमती नदी पर बड़ा पुल का निर्माण होगा। सहरसा- कोपरिया तक पहले चरण में होगा काम रेलवे के निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कार्य जल्द पूरा हो इसके लिए दोहरीकरण कार्य को चार चरणों में गांटा जाएगा। पहले चरण में सहरसा – कोपरिया के बीच दोहरीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा। चुकी इस रेल खंड के बीच पुलों की संख्या कम है। दूसरे चरण में कोपरिया- धमारा तीसरे चरण में धमारा-बदलाघाट और चौथे व अंतिम चरण में बदला- मानसी के बीच रेलवे ट्रैक के साथ ही पुलों का भी निर्माण कराया जाएगा। रेलवे ट्रेक निर्माण के साथ ही खंड के विद्युतीकरण का काम भी साथ-साथ पूरा किया जाएगा। रेलवे अधिकारी ने बताया कि यह लाइन मानसी से सहरसा तक बन जाती है, तो आगे सरायगढ़ दिशा के रेल संपर्क के लिए महत्वपूर्ण है। अभी यह पूरा हिस्सा एकल लाइन पर आधारित है, जिससे ट्रेनों के परिचालन में कई बार क्रॉसिंग के कारण विलंब होता है। दोहरीकरण के बाद इस खंड पर मालगाड़ियों का परिचालन बढ़ाया जाएगा। जिससे मक्का, गेहू और चावल इस इलाके से दूसरे इलाकों में ले जाना आसान होगा।

