मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि राज्य में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। विशेषकर गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा जैसे जिलों में, जहां बाल विवाह के मामले अधिक हैं, वहां व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली बेटियों को ब्रांड एंबेसडर बनाया जाए, ताकि समाज को प्रेरणा मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी जीर्ण-शीर्ण और किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को सीएसआर और डीएमएफटी फंड के जरिए जल्द से जल्द नए मॉडल भवनों में शिफ्ट किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि सभी केंद्रों के पास अपनी आधारभूत संरचना हो और वहां बिजली, शौचालय तथा शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों। महिलाओं की सुरक्षा और सहायता पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ और महिला हेल्पलाइन नंबर को लेकर ग्रामीण महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए। इसे स्थानीय पुलिस प्रशासन से जोड़कर, हिंसा पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का तुरंत निवारण किया जाए। मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन समेत कई योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में ‘मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना’, ‘मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना’ और ‘सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बजट की राशि का पूरा उपयोग करते हुए विकास की किरण समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाएं। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक समाज कल्याण किरण कुमार पासी, अपर सचिव महिला बाल विकास विभाग अभय नंदन अम्बष्ट, निदेशक आईसीपीएसश्री विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मिशन मोड में बनेंगे मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले- बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली बेटियां ब्रांड एंबेसडर बनें
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि राज्य में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। विशेषकर गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा जैसे जिलों में, जहां बाल विवाह के मामले अधिक हैं, वहां व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली बेटियों को ब्रांड एंबेसडर बनाया जाए, ताकि समाज को प्रेरणा मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी जीर्ण-शीर्ण और किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को सीएसआर और डीएमएफटी फंड के जरिए जल्द से जल्द नए मॉडल भवनों में शिफ्ट किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि सभी केंद्रों के पास अपनी आधारभूत संरचना हो और वहां बिजली, शौचालय तथा शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों। महिलाओं की सुरक्षा और सहायता पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ और महिला हेल्पलाइन नंबर को लेकर ग्रामीण महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए। इसे स्थानीय पुलिस प्रशासन से जोड़कर, हिंसा पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का तुरंत निवारण किया जाए। मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन समेत कई योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में ‘मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना’, ‘मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना’ और ‘सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बजट की राशि का पूरा उपयोग करते हुए विकास की किरण समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाएं। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक समाज कल्याण किरण कुमार पासी, अपर सचिव महिला बाल विकास विभाग अभय नंदन अम्बष्ट, निदेशक आईसीपीएसश्री विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

