छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दे दी है. मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को कोर्ट ने कवासी लखमा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) दोनों मामलों में जमानत दे दी.
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी है. कोर्ट ने कहा कि कवासी अंतरिम जमानत के दौरान छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे. लखमा छत्तीसगढ़ में तब तक प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक कि उन्हें कोर्ट में पेश न होना हो. हालांकि, वह कोर्ट की सुनवाई से एक दिन पहले राज्य में आ सकते हैं. इसके अलावा, वह विदेश यात्रा नहीं करेंगे और पासपोर्ट स्पेशल जज की कोर्ट में जमा करना होगा. कवासी लखमा को अपना फोन नंबर ईडी अधिकारी को देना होगा और इस नंबर को ट्रायल कोर्ट को बताए बिना बदला नहीं जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया कि कवासी लखमा को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा, सिर्फ स्वास्थ्य कारणों को लेकर ही उन्हें पेशी में छूट दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच में काफी समय लगने की संभावना है और जल्दबाजी में ट्रायल का प्रॉसिक्यूशन केस पर बुरा असर पड़ सकता है इसलिए जांच पूरी करने के लिए पूरी छूट दी जानी चाहिए.
कवासी लखमा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह एक आदिवासी हैं और 6 बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले में घूस लेने का आरोप है, लेकिन कोई भी बरामदगी नहीं हुई है. कवासी लखमा की उम्र 67 साल हो चुकी है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए.
राज्य सरकार और ईडी की ओर से कवासी लखमा की जमानत का विरोध किया गया. राज्य सरकार ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें मंत्रियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है. इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है.
15 जनवरी 2025 को ईडी और 2 अप्रैल 2025 को ईओडब्ल्यू ने लखमा को गिरफ्तार किया था. इस मामले में कई चार्जशीट फाइल की जा चुकी हैं और जांच पूरी हो चुकी है. इस केस में 1193 गवाह बनाए गए हैं. कुल 52 आरोपी हैं, जिनमें से 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. पहले ही 19 लोगों को जमानत मिल चुकी है.