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मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में शुक्रवार को अचानक छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ गई। फूड प्वाइजनिंग की आशंका में एक के बाद एक छात्र-छात्राओं और कॉलेज कर्मचारियों को इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल लाया गया। मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शाम करीब 3 बजे से शुरू होकर देर रात 1 बजे तक चला। सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टरों के अनुसार, शाम से देर रात तक करीब 50 छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों का इलाज चल रहा था। कॉलेज कर्मचारियों ने भी लगभग 50 छात्रों और कर्मचारियों के प्रभावित होने की जानकारी दी है। हालांकि, देर रात तक पीड़ितों की सही संख्या साफ नहीं हो पाई थी। पेट दर्द, उल्टी और सिरदर्द से छात्रों की बिगड़ी हालत कॉलेज परिसर में शुक्रवार दोपहर बाद अलग-अलग हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द और बुखार जैसी दिक्कतें होने लगीं। एक साथ कई लोगों की तबीयत बिगड़ने पर कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें सदर अस्पताल भेजना शुरू किया। लगातार एंबुलेंस से मरीजों के पहुंचने के कारण सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भीड़ बढ़ गई। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी सभी मरीजों के इलाज में लगे रहे। इमरजेंसी में इलाज कर रहे डॉक्टर फैजुद्दीन ने बताया कि अब तक 30 से ज्यादा छात्र-छात्राओं का इलाज किया जा चुका है। उन्होंने सभी बीमार छात्रों और कर्मचारियों का तुरंत इलाज किया और स्थिति सामान्य करने में जुटे रहे। ज्यादातर मरीजों को पेट दर्द, उल्टी और सिरदर्द की शिकायत थी। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। विश्वकर्मा पूजा के प्रसाद से फूड प्वाइजनिंग की आशंका
घटना के पीछे फिलहाल कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। कॉलेज परिसर में 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का आयोजन हुआ था। बताया जा रहा है कि पूजा में शामिल कुछ लोगों ने प्रसाद का सेवन किया था। इसके बाद शुक्रवार को कई लोगों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। हालांकि कुछ छात्राओं ने खाना में फूड प्वाइजनिंग तो कुछ ने प्रसाद में चना रहने के कारण भी तबियत बिगड़ने के दावा किया। अब सच्चाई फूड इंस्पेक्टर के द्वारा जांच करने के बाद ही घटना के सही कर्म का आकलन किया जा सकता है। ऐसे में प्रारंभिक तौर पर प्रसाद को भी फूड पॉइजनिंग की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, कॉलेज प्रबंधन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच टीम गठित इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर ने बताया कि शुक्रवार दोपहर से कई छात्र-छात्राओं और कर्मियों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सभी को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। जिसकी जैसे जैसे सूचना आता गया स्वयं अस्पताल में रहकर कर्मी सहित प्राभारी प्राचार्य ने देर रात तक छात्र-छात्राओं का इलाज करवाने में लगे थे। प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कॉलेज परिसर में उच्च स्तरीय जांच टीम गठित कर दी गई है। शनिवार को जांच कराया जाएगा, टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही फूड पॉइजनिंग के कारणों के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। प्रभारी प्राचार्य के अनुसार, फिलहाल कॉलेज परिसर की स्थिति सामान्य है। जिन छात्र-छात्राओं की तबीयत खराब हुई, उनमें कुछ घबराहट की स्थिति भी थी। उन्हें एहतियात के तौर पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना वरीय अधिकारियों और विभाग को भी दे दी गई है। स्थिति की जानकारी लेने के लिए कॉलेज के प्राचार्य समेत अन्य अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। सदर अस्पताल से आई तस्वीरें….. इंजीनियरिंग कॉलेज में शिविर लगाकर छात्रों की होगी जांच इधर इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं के अभिव्यवाहक कॉलेज परिसर के गर्मी और स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रशासनिक महकमा में भी घटना को लेकर चिंता का विषय बना रहा। बताया जाता है कि वरीय अधिकारी के निर्देश पर आज शनिवार को इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में डॉक्टर की टीम जाएगी और शिविर लगाकर छात्र छात्राओं के अलावा कर्मियों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। वहीं फूड इंस्पेक्टर भी कॉलेज परिसर जाकर खाद्य सामग्री की जांच करेंगे। इसके अलावा सैंपल भी जांच के लिए ऊपर भेजा जाएगा।
सदर अस्पताल में एक बेड पर 2 से 3 का हुआ इलाज इधर घटना के बाद जब सदर अस्पताल में अचानक बीमार पड़ा छात्र-छात्राओं के अलावा कमी को एंबुलेंस से लाया जा रहा था, सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अचानक काफी ज्यादा भीड़ बढ़ गई। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मी और चिकित्सा टीम के द्वारा इमरजेंसी वार्ड में लगा बेड के अलावा रेड जॉन में लगा बेड पर सभी बीमार व्यक्तियों को लेट कर इलाज किया जा रहा था।
इस दौरान इमरजेंसी वार्ड में जगह का अभाव इतना ज्यादा कम पड़ गया कि एक बेड पर दो से तीन बीमार छात्र-छात्राओं का इलाज हुआ। वहीं ठीक होने वाले छात्र-छात्राओं को जिस एंबुलेंस से सदर अस्पताल से लेकर 5 किलोमीटर दूर इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचा जा रहा था। उसी एंबुलेंस से फिर इंजीनियरिंग कॉलेज से बीमार छात्र-छात्राओं को सदर अस्पताल लाया जा रहा था।
एंबुलेंस चालक के द्वारा लगातार देर रात तक यह लाने और पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा। इधर इस घटना के बाद बीमार पड़ा छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की चिंता बढ़ाई रही और लगातार फोन पर अभिभावक अपने-अपने बच्चों से उनका हालात और स्थिति के बारे में फोन पर अवगत हो रहे थे।
