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मुजफ्फरपुर के निजी स्कूलों पर मनमानी का आरोप, प्रशासन सख्त:पेरेंट्स बोले- बुक-ड्रेस की खरीदारी पर दबाव, DM ने दिए जांच के आदेश


मुजफ्फरपुर में नए शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ ही निजी स्कूलों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। जिले के अभिभावकों ने स्कूलों पर तानाशाही और आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है। मुख्य विवाद स्कूलों की ओर से किताबों और कॉपियों की खरीदारी के लिए खास दुकानों को अनिवार्य बनाने को लेकर है।अभिभावकों की शिकायत है कि कई प्रतिष्ठित स्कूल उन्हें एक सूची देते हैं और मौखिक या लिखित रूप से निर्देश देते हैं कि सामग्री केवल चयनित विक्रेताओं से ही खरीदी जाए। उनका आरोप है कि इन दुकानों पर किताबें और स्टेशनरी बाजार मूल्य से काफी अधिक दामों पर बेची जा रही हैं। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल प्रशासन और दुकानदारों के बीच अंदरूनी साठगांठ है। इससे अभिभावकों को खुले बाजार से सस्ती किताबें खरीदने का विकल्प नहीं मिल पाता, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।इस मामले में जिले के आला अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा, “किताबों की खरीद के लिए बाजार पूरी तरह खुला है। अभिभावक अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी भी स्कूल द्वारा किसी खास दुकान से खरीदारी करने के लिए दबाव बनाना पूरी तरह अनुचित और नियमों के विरुद्ध है। डीएम बोले- दोषी पाए जाने पर मान्यता होगी रद्द “जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को मौखिक शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन कार्रवाई के लिए ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अभिभावक किसी विशेष स्कूल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराता है, तो तुरंत जिला स्तर पर एक विशेष टीम गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में यदि स्कूल प्रशासन दोषी पाया जाता है, तो उनकी मान्यता रद्द करने से लेकर भारी जुर्माना लगाने तक की कार्रवाई की जा सकती है। जिलाधिकारी के इस कड़े तेवर के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि निजी स्कूलों की इस सिंडिकेट वाली कार्यप्रणाली पर लगाम लगेगी और अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।

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