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बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में पैट 2023-24 के भूगोल विषय के परिणाम को लेकर विवाद चल रहा है। गोल्ड मेडलिस्ट छात्र अविनाश कुमार का आमरण अनशन चौथे दिन खत्म हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगें स्वीकार कर ली गई है। पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा की पहल पर विश्वविद्यालय के पैट नोडल पदाधिकारी टीकेडे और विधि पदाधिकारी मयंक कपिला धरना स्थल पहुंचे और अविनाश कुमार को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनशन के बाद पैट 2023 और 2024 के भूगोल विषय के परीक्षाफल की समीक्षा के लिए कमेटी गठित की। कुलपति आवास पर आयोजित आपात बैठक में कुलपति, सीसीडीसी, पूर्व कुलानुशासक, विधि पदाधिकारी और नोडल पदाधिकारी समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए। अभ्यर्थी का नामांकन रद्द किया जांच के दौरान कमेटी ने पाया कि पूर्व में चयनित अभ्यर्थी निशा कुमारी के आवेदन में अंक निर्धारण को लेकर त्रुटियां थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नेट योग्यता का लाभ लिया था, जबकि उन्होंने वर्ष 2013 में नेट परीक्षा पास की थी। यूजीसी नियमों के अनुसार इसका लाभ केवल निर्धारित अवधि तक ही मान्य होता है। इसके अलावा, मई 2024 से एमडीडीएम कॉलेज, मुजफ्फरपुर में स्थायी शिक्षक के रूप में कार्यरत होने के बावजूद उन्हें 10 वेटेज अंक दिए गए, जबकि संबंधित प्रावधान के अनुसार इसके लिए कम से कम तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक है। इन अनियमितताओं के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने निशा कुमारी का चयन और नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। रिक्त हुई अनारक्षित सीट पर अविनाश कुमार और ऋषभ कुमार मिश्रा, दोनों के 81 अंक होने के कारण एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर मेरिट का निर्धारण किया गया, जिसमें अधिक अंक होने के कारण अविनाश कुमार को पैट 2023-24 भूगोल विषय की चयन सूची में शामिल कर लिया गया।
‘अन्य छात्रों को भी मिलना चाहिए न्याय’ अनशन समाप्त करने के बाद अविनाश ने कहा कि कई दौर की बातचीत के बावजूद जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो आमरण अनशन ही अंतिम विकल्प बचा था। उन्होंने कहा कि उनका नाम तो मेरिट लिस्ट में जोड़ दिया गया है, लेकिन अभी भी कई ऐसे योग्य छात्र हैं जिन्हें रोस्टर नियमों का पालन नहीं होने के कारण बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। ‘मेधा सूची में संशोधन ही धांधली का प्रमाण’ इधर, छात्र नेता डॉ. चंदन यादव ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि मेधा सूची में संशोधन से धांधली के आरोप सही साबित हुए हैं और मेधावी छात्र अविनाश कुमार को न्याय मिला है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है। जब तक सभी विज्ञापित सीटों पर रोस्टर नियमावली के अनुसार पूर्ण मेधा सूची जारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस अवसर पर छात्र लोजपा के प्रदेश प्रधान महासचिव गोल्डन सिंह ने प्रशासन से डॉ. चंदन यादव पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग की। संयुक्त छात्र संगठन ने भी आगे आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। धरना स्थल पर वीआईपी के नीलाभ कुमार, अक्षय शुक्ला, बसंत सिंह, तैयब खान, आदित्य करण, चंदन पासवान, अभिमानी राज, आदर्श कुमार, प्रभात कुमार, रमन शुक्ला सहित बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
क्या है पूरा विवाद PAT 2023-24 की मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद संयुक्त छात्र संगठनों ने उसमें रोस्टर नियमों के उल्लंघन और मेधावी छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए लगातार आंदोलन किया था। गोल्ड मेडलिस्ट अविनाश चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे। अब उनकी मांग पूरी होने के बाद अनशन समाप्त हो गया है, लेकिन अन्य अभ्यर्थियों के मुद्दे पर छात्र संगठनों ने अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

