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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को मुजफ्फरपुर के अस्पतालों में सिर्फ नवजातों की किलकारियां ही नहीं गूंजीं, बल्कि कई परिवारों के लिए यह दिन धार्मिक आस्था और खुशियों का खास संयोग बन गया। जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाह में कई माता-पिता ने प्रसव का समय पहले से तय कराया। इसके लिए चिकित्सकीय सलाह के बाद प्लान्ड सिजेरियन डिलीवरी का विकल्प भी चुना गया। शहर के अलग-अलग अस्पतालों में जन्माष्टमी के दिन कुल 55 बच्चों के जन्म की जानकारी सामने आई है। इनमें सामान्य प्रसव के साथ सिजेरियन से जन्म लेने वाले बच्चे भी शामिल हैं। कुछ परिवारों की इच्छा थी कि बच्चे का जन्म जन्माष्टमी के दिन या विशेष रूप से रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के समय के आसपास हो। जन्माष्टमी पर जन्में बच्चों की दो तस्वीरें देखिए रात 12 बजे जन्म की भी डिमांड, डॉक्टरों ने समय के हिसाब से बनाई प्लानिंग मेडिवर्स अस्पताल की डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि आजकल कई परिवार शुभ तारीख और मुहूर्त देखकर डिलीवरी प्लान करने की इच्छा रखते हैं। जन्माष्टमी जैसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण दिन पर ऐसी डिमांड और बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि सामान्य प्रसव को किसी निश्चित समय पर कराना संभव नहीं होता, क्योंकि प्रसव प्राकृतिक प्रक्रिया है और लेबर पेन कभी भी शुरू हो सकता है। वहीं, जिन मरीजों का सिजेरियन चिकित्सकीय रूप से तय होता है, उनमें तारीख और समय को डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्लान किया जा सकता है। डॉक्टर के अनुसार कुछ परिवारों की खास इच्छा रहती है कि बच्चे का जन्म ठीक रात 12 बजे हो। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए समय का समायोजन करने का प्रयास किया जाता है। जन्माष्टमी की रात भी कुछ डिलीवरी पहले से प्लान होने की बात सामने आई है। ‘इंतजार है कितने कृष्ण और कितनी राधा आएंगी’ कवच हॉस्पिटल के संचालक दिनेश चंद्रा ने बताया कि जन्माष्टमी पर उनके यहां कुछ मरीज भर्ती हैं। इनमें दो परिवारों ने इसी दिन सिजेरियन के जरिए बच्चे के जन्म की इच्छा जताई है। उन्होंने बताया कि अभी दिन की शुरुआत है और अस्पताल में इंतजार है कि इस बार कितने कृष्ण जन्म लेंगे और कितनी राधाएं आएंगी। उनके अनुसार जन्माष्टमी को शुभ अवसर मानकर कई परिवार पहले से समय देखकर डिलीवरी की इच्छा जताते हैं। ‘किसी को 1 से 2 बजे, तो किसी को सुबह का मुहूर्त चाहिए’ डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि कई मरीज पंडित द्वारा बताए गए मुहूर्त के अनुसार अस्पताल पहुंचते हैं। कोई एक से दो बजे के बीच तो कोई सुबह के किसी खास समय में बच्चे के जन्म की इच्छा जताता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के लिए सबसे महत्वपूर्ण मरीज और बच्चे की सुरक्षा है। इमरजेंसी व्यवस्था को देखते हुए डॉक्टरों की टीम उसी हिसाब से डिलीवरी की प्लानिंग करती है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य प्रसव के मामले में स्थिति अलग होती है। कई बार परिवार किसी खास दिन डिलीवरी चाहते हैं, ऐसे में इंडक्शन की कोशिश की जाती है, लेकिन प्रसव हर स्थिति में तय समय पर हो, यह जरूरी नहीं है। कभी-कभी लेबर आगे नहीं बढ़ता या डिलीवरी में देरी हो जाती है। जन्माष्टमी पर 55 बच्चों ने लिया जन्म जन्माष्टमी के दिन शहर के अलग-अलग अस्पतालों में बड़ी संख्या में बच्चों का जन्म हुआ। – केजरीवाल मेटर्निटी अस्पताल: रात 12 बजे से शुक्रवार दोपहर तक 10 बच्चों का जन्म, इनमें 5 लड़के और 5 लड़कियां। सभी का सामान्य प्रसव हुआ। – एक बड़े निजी अस्पताल: 15 बच्चों का जन्म, इनमें 8 लड़के और 7 लड़कियां। छह बच्चों का जन्म सिजेरियन से हुआ। – सदर अस्पताल: 10 नवजातों का जन्म, इनमें 8 लड़के और 2 लड़कियां। – एसकेएमसीएच: जन्माष्टमी पर सबसे अधिक 20 बच्चों का जन्म, इनमें 13 लड़के और 7 लड़कियां। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जन्माष्टमी के दिन इन अस्पतालों में कुल 55 बच्चों की किलकारी गूंजी। डॉक्टर बोले- मुहूर्त के लिए समय से पहले डिलीवरी ठीक नहीं पीडियाट्रिशियन डॉ. राकेश कुमार ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल किसी शुभ मुहूर्त के लिए समय से पहले डिलीवरी कराना बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। प्री-मैच्योर डिलीवरी से शिशु के फेफड़ों और मस्तिष्क के विकास पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यदि प्रसव की तारीख में एक-दो दिन का अंतर हो और मां-बच्चे की स्थिति सामान्य हो, तो डॉक्टर की जांच और सलाह के बाद डिलीवरी की योजना बनाई जा सकती है। केजरीवाल अस्पताल के डॉक्टर अमरेंद्र कृष्णा ने भी कहा कि बच्चे के जन्म का समय मुख्य रूप से प्राकृतिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है। कुछ परिवार शुभ तिथि या विशेष दिन को प्राथमिकता जरूर देते हैं, लेकिन डिलीवरी का निर्णय चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर ही होना चाहिए। ज्योतिषाचार्य बोले- प्राकृतिक जन्म ही सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य रमाकांत झा ने बताया कि जन्माष्टमी का दिन सनातन परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है। इस बार रोहिणी नक्षत्र और विशेष योग के संयोग के कारण भी लोगों में शुभ मुहूर्त को लेकर उत्साह है। उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक रूप से जन्माष्टमी के शुभ समय में बच्चे का जन्म होता है तो इसे अच्छा माना जाता है। लेकिन केवल मुहूर्त के मोह में आकर समय से पहले या जबरन सिजेरियन कराने का दबाव बनाना उचित नहीं है। बच्चे और मां की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकीय सलाह का पालन किया जाना चाहिए। यानी जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाह जरूर बढ़ी है, लेकिन अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ा मुहूर्त मां और नवजात की सुरक्षित डिलीवरी ही है।
मुजफ्फरपुर में जन्माष्टमी पर अस्पतालों में 55 बच्चों का जन्म:34 लड़कों, 21 लड़कियों की गूंजी किलकारी, डॉक्टर बोले- रात 12 बजे जन्म की डिमांड थी
