Tuesday, September 1, 2026

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मुजफ्फरपुर में पेपरलेस रजिस्ट्री का विरोध:कातिबों की अघोषित हड़ताल, सब-रजिस्ट्रार बोले- हर दिन बढ़ रहा रजिस्ट्री का ग्राफ


मुजफ्फरपुर में बिहार सरकार की नई डिजिटल और पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था का विरोध बढ़ता जा रहा है। जिला अवर निबंधन कार्यालय में कातिबों ने इस डिजिटल पहल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उनकी अघोषित हड़ताल और काम बंद करने से शुरुआती दिनों में संपत्ति की रजिस्ट्री पर असर हुआ है। हालांकि, प्रशासन ने आम जनता को राहत देने के लिए दूसरे इंतजाम किए हैं। सरकार से नियम वापस लेने की मांग आंदोलन कर रहे कातिबों की साफ मांग है कि सरकार इस नई डिजिटल और ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रणाली को तुरंत वापस ले। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से काम का तरीका बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसलिए, वे पहले वाली ऑफलाइन प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। कातिब संघ का मानना है कि ऑफलाइन व्यवस्था ज्यादा आसान और ठीक थी, जिससे खरीदारों और विक्रेताओं को आसानी होती थी। आनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता का दावा कर रही सरकार दूसरी तरफ, राज्य सरकार के साफ निर्देश हैं कि जमीन और संपत्तियों की रजिस्ट्री अब सिर्फ डिजिटल और पेपरलेस तरीके से ही होगी। सरकार का तर्क है कि इस तकनीकी बदलाव से रजिस्ट्री प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता आएगी। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और लोगों को बिचौलियों के पास नहीं जाना पड़ेगा। नई व्यवस्था का मुख्य मकसद पूरी प्रक्रिया को तेज, आसान और जवाबदेह बनाना है। सब-रजिस्ट्रार बोले विभाग को हड़ताल की जानकारी नहीं कातिबों के इस विरोध पर मुजफ्फरपुर के सब-रजिस्ट्रार अजय कुमार ने प्रशासनिक स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि निबंधन कार्यालय को कातिबों या उनके संगठन की ओर से कोई लिखित आवेदन या आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। जब तक कोई लिखित सूचना नहीं मिलती, प्रशासनिक तौर पर इसे सही हड़ताल नहीं माना जा सकता। इसलिए, यह प्रदर्शन पूरी तरह से एक ‘अघोषित हड़ताल’ की श्रेणी में आती है। रोज बढ़ रहा रजिस्ट्री का ग्राफ सब-रजिस्ट्रार ने आश्वस्त किया कि कातिबों के अनुपस्थित रहने के बावजूद निबंधन कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए विभागीय कर्मियों को सीधे मदद में लगाया गया है। कर्मचारी खुद आवेदकों का मार्गदर्शन कर ऑनलाइन कागजात तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं। अजय कुमार ने दावा किया कि शुरुआती तकनीकी झटकों के बाद अब स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है और रोजाना होने वाली रजिस्ट्री का आंकड़ा बढ़ा है। हर दिन हो रही 8 से 10 जमीनों की रजिस्ट्री वर्तमान में कार्यालय में रोजाना औसतन 8 से 10 जमीनों की रजिस्ट्री सफलतापूर्वक निष्पादित की जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आम जनता की सुविधा सर्वोपरि है और ऑनलाइन प्रक्रिया को निर्बाध रूप से चालू रखा जाएगा।

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