![]()
नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों का असर अब बिहार के मोतिहारी में भी देखने को मिला। यहां बड़ी संख्या में छात्रों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षाविद् सोनम वांग्चुक के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की। कैंडल मार्च में शामिल छात्र नेता संतोष कुमार ने कहा कि नीट पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सत्याग्रहियों और सोनम वांग्चुक के आंदोलन के प्रति भी समर्थन जताया। शांतिपूर्ण तरीके से निकाला गया कैंडल मार्च छात्रों ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से छात्र और शिक्षाविद् विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी के समर्थन में मोतिहारी में कैंडल मार्च आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति ली गई थी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात था। मार्च के दौरान छात्रों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर दो मिनट का मौन रखा और प्रभावित छात्रों के बेहतर भविष्य की कामना की। छात्रों ने साझा की अपनी पीड़ा प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि पूरे वर्ष की मेहनत के बाद पेपर लीक की खबर ने छात्रों के मनोबल को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि वे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। छात्र ने यह भी कहा कि उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का रास्ता चुना है। पांच सूत्री मांग पत्र किया जारी प्रदर्शनकारियों ने पांच सूत्री मांग पत्र जारी कर नीट परीक्षा की सीबीआई जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। छात्रों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। संविधान के प्रति आस्था जताई कचहरी चौक पर मार्च के समापन के बाद छात्रों ने संविधान की प्रति के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का संकल्प लिया। साथ ही उन्होंने आम जनता, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से इस मुद्दे पर समर्थन की अपील की।

