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“हम न्यू करबिगहिया में रहते हैं। पहले लोग इस मोहल्ले को स्टेशन के पास का अच्छा इलाका कहते थे। अब शाम होते ही यहां हालात बदल जाते हैं, यहां-वहां सज धजकर लड़कियां खड़ी हो जाती हैं। कोई सड़क पर टहलती रहती है, तो कोई किसी दुकान किनारे खड़ी हो जाती है। बड़ी-बड़ी कारें आती हैं और उसमें बैठकर ये चली जाती हैं। पूरी मंडी बन गई है। ये हालात देखकर हमारी बेटियों के रिश्ते टूट रहे। विरोध करने वाले हमारे बेटे बंटी को भी उठा ले गए।” ये कहना उस मां का है, जिसके बेटे का पटना स्टेशन के पास से अपहरण हो गया है। तीन दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक बेटे का कोई पता नहीं चला है। परिवार विरोध प्रदर्शन, थाने का घेराव, सब कुछ कर चुका है पर बेटा नहीं मिला। परिवार वालों ने अपहरण का कारण वहां चलने वाले सेक्स रैकेट का विरोध करना बताया है। पूरी घटना कैसे हुई, बेटे का अपहरण कब हुआ, परिवार का क्या कहना है और पटना स्टेशन के बाहर का इलाका करबिगहिया की महिलाएं क्या कहती हैं?…पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले परिवार का गमगीन माहौल देखिए पटना जंक्शन का प्लेटफॉर्म नंबर-10, सुबह से लेकर देर रात तक हजारों यात्रियों की आवाजाही रहती है। बाहर ऑटो वालों की आवाज, रिक्शों की कतार और ठेलों की भीड़ दिखाई देती है। इसी भीड़ से थोड़ा आगे बढ़ते ही न्यू करबिगहिया शुरू हो जाता है। पहली नजर में यह किसी दूसरे रिहायशी मोहल्ले जैसा ही लगता है। दोनों तरफ मकान हैं। नीचे छोटी-छोटी दुकानें हैं। बीच में संकरी सड़क है, जहां से लगातार लोग आते-जाते रहते हैं। दैनिक भास्कर की टीम बुधवार दोपहर बंटी कुमार के घर पहुंची। घर के बाहर मोहल्ले के लोग खड़े थे। अंदर का माहौल पूरी तरह गमगीन था। बंटी की मां लगातार रो रही थीं। बहन की आंखें सूज चुकी थीं। घर में मौजूद कोई भी व्यक्ति सामान्य तरीके से बात नहीं कर पा रहा था। हर बातचीत एक ही सवाल पर आकर रुक जाती थी, ‘बंटी कहां है?’ परिवार का कहना है कि बेटे को गायब हुए 72 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं। अब उम्मीद से ज्यादा डर लग रहा है। हर फोन कॉल पर घर वाले चौंक जाते हैं। दरवाजे पर किसी के आने की आहट होती है तो सबकी नजर उसी तरफ चली जाती है। तस्वीरें में देखें बंटी का घर और आसपास का माहौल घर से बाहर निकलते ही बातचीत का विषय बदल गया। यहां किसी ने सबसे पहले अपहरण की बात नहीं की। लोगों ने सबसे पहले मोहल्ले की बदनामी का जिक्र किया। हर दूसरा व्यक्ति यही कह रहा था कि पिछले दो साल में इलाके की पहचान पूरी तरह बदल गई है। उनका आरोप है कि शाम ढलते ही सड़क किनारे लड़कियां खड़ी दिखाई देती हैं। कुछ देर बाद कारें आने लगती हैं। बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। रात गहराने के साथ यह गतिविधियां और तेज हो जाती हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने कई बार पुलिस से शिकायत की। विरोध प्रदर्शन भी किए। लेकिन हालात नहीं बदले। अब बंटी के लापता होने के बाद लोगों का डर और बढ़ गया है। उन्हें लगता है कि अगर विरोध करने वाले के साथ ऐसा हो सकता है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। ‘हमारी बेटियों का क्या कसूर, उनके रिश्ते तक नहीं आते हैं बंटी के भाई बातचीत शुरू करते हैं, तो आवाज में गुस्से से ज्यादा बेबसी सुनाई देती है। वह कहते हैं कि सबसे बड़ा दर्द सिर्फ बंटी का गायब होना नहीं है। पूरे मोहल्ले की पहचान बदल चुकी है। “दो साल से विरोध कर रहे हैं। प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब हाल यह है कि कोई अपनी बेटी यहां ब्याहना नहीं चाहता। लड़के वाले आते हैं। मोहल्ले के बारे में पूछते हैं। फिर बिना कुछ कहे चले जाते हैं। बाद में मना कर देते हैं।” उनकी बात सुन रहे आनंद कुमार भी बातचीत में शामिल हो जाते हैं। आनंद, बंटी के ममेरे भाई हैं। वे बताते हैं कि पिछले एक साल में दो-तीन लड़कियों की शादी सिर्फ इसलिए टूट गई, क्योंकि लड़के वालों ने मोहल्ले की स्थिति के बारे में जानकारी ले ली। “लड़कियों की कोई गलती नहीं थी। लेकिन पता यही पूछा जाता है कि लड़की किस मोहल्ले की है। जैसे ही करबिगहिया का नाम आता है, लोग सवाल करने लगते हैं। आखिर परिवार क्या जवाब दें?” पास बैठी बंटी की फुआ सुनीता देवी भी भावुक हो जाती हैं। वह कहती हैं कि अब बेटी और बहू को अकेले बाहर भेजने में डर लगता है। हर समय चिंता बनी रहती है कि कौन सड़क पर मिलेगा और क्या माहौल होगा। स्थानीय महिला मंजू देवी कहती है, सबसे ज्यादा मानसिक दबाव महिलाओं पर पड़ा है। पहले शाम तक बाजार जाते थे। अब अंधेरा होने से पहले घर लौट आते हैं। बच्चियों को भी समझाकर रखा जाता है कि बेवजह बाहर मत निकलना। परिवार का कहना है कि कई बार मोहल्ले के लोगों ने बैठक की। प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई। उन्हें उम्मीद थी कि कार्रवाई होगी और इलाके की छवि सुधरेगी। लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। अब बंटी के गायब होने के बाद यह डर और गहरा गया है। ‘शाम 6 बजे के बाद पूरा इलाका बदल जाता है’ पटना जंक्शन परिसर में पिछले दस साल से दातून बेच रहीं 65 वर्षीय सुमित्रा देवी रोज इस इलाके को देखती हैं। उन्होंने बिना किसी भूमिका के कहा “अगर समझना है कि यहां क्या होता है तो दिन में मत आइए। शाम 6 बजे के बाद आइए। तब असली तस्वीर दिखाई देगी।” सुमित्रा देवी के मुताबिक, शाम ढलते ही जंक्शन से करबिगहिया की तरफ बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। देर रात तक गाड़ियों का आना-जाना लगा रहता है। उनका कहना है कि यह सब नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहा है। थोड़ी दूर रहने वाली मालती देवी भी इसी बात को आगे बढ़ाती हैं। वह कहती हैं, ‘रात में बड़ी-बड़ी कारें रुकती हैं। उनमें कई लोग आते-जाते हैं। इससे मोहल्ले की महिलाओं और बच्चियों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। अब रात नौ बजे के बाद अकेले बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। जरूरत हो तो भी किसी को साथ लेकर जाना पड़ता है।’ स्थानीय निवासी राजीव कुमार बताते हैं, पांच साल पहले तक यहां ऐसा माहौल नहीं था। पटना जंक्शन परिसर की व्यवस्था बदलने के बाद कथित अवैध गतिविधियां धीरे-धीरे करबिगहिया की तरफ आने लगीं। राजीव कहते हैं “हमने कई बार पुलिस को शिकायत दी। लिखित भी और मौखिक भी। विरोध प्रदर्शन भी किए। लेकिन लोगों को लगता है कि कार्रवाई उतनी नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी।” स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी वजह से पूरे इलाके की सामाजिक पहचान प्रभावित हुई। अब यहां रहने वाले सम्मानित परिवार भी खुद को असहज महसूस करते हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें अपने मोहल्ले का नाम बताते हुए भी संकोच होने लगा है। बंटी के साथ मारपीट और किडनैपिंग की तस्वीरें देखें… ‘बंटी विरोध करता था- 15 दिन पहले हुआ था विवाद’ स्थानीय लोगों की बातचीत में ये बात सामने आया कि बंटी इस अवैध कामों का विरोध कर रहा था। वह स्थानीय लोगों के साथ बैठकों और विरोध प्रदर्शन में में भी शामिल होता था आनंद कुमार बताते हैं कि करीब 15 दिन पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान बंटी का रवीश उर्फ बीसी से विवाद हुआ था। इस दौरान बंटी को देख लेने की धमकी दी थी। सोमवार की रात बंटी दही खरीदने के लिए पटना जंक्शन के पास गया था। वहीं कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद उसे ब्लैक रंग की स्कॉर्पियो में बैठाकर ले जाया गया। घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है। स्थानीय महिला गुड़िया देवी कहती हैं कि बंटी किसी व्यक्तिगत विवाद में नहीं था। “वह मोहल्ले के लोगों के साथ खड़ा था। इसी वजह से उसे निशाना बनाया गया।” अब तक परिवार कई बार कोतवाली थाने जा चुका है। बरामदगी नहीं होने पर वहां हंगामा भी हुआ। स्थानीय लोगों ने न्यू करबिगहिया में करीब तीन घंटे तक सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। आगजनी भी की गई। लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और बंटी की सकुशल बरामदगी की मांग की। 33 साल का बंटी न्यू करबिगहिया इलाके में रहता है। वह इसी इलाके में फास्ट फूड की दुकान का ओनर है। इसके अलावा वह दुकानों को भी रेंट पर देता है। परिवार में पत्नी, दो बच्चे और मां है। बंटी के पिता का काफी वक्त पहले निधन हो चुका है। अब तक पुलिस ने क्या किया परिवार ने जिस रवीश पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अब तक बजरंगी, रोहित और रवि उर्फ चंदू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। करीब 70 से 80 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की जा चुकी है। रेलवे स्टेशन, मुख्य सड़क, चौराहों और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस टीम, छापेमारी दल, डायल-100 और स्पेशल इंटेलिजेंस यूनिट एक साथ जांच में लगी हैं। शहर के कई इलाकों में वाहन जांच अभियान भी चलाया जा रहा है। अब पटना में हुए प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए जक्कनपुर थानाध्यक्ष ऋतुराज कुमार सिंह ने बताया कि जंक्शन और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी देह व्यापार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जून महीने में इस मामले में तीन किन्नरों को जेल भेजा गया था। इस मामले में भी हर पहलू की जांच की जा रही है और प्राथमिकता बंटी कुमार की सकुशल बरामदगी है। लेकिन पुलिस जांच के समानांतर न्यू करबिगहिया के लोगों के मन में एक और सवाल लगातार गूंज रहा है। उनका कहना है कि अगर पहले की शिकायतों पर सख्ती से कार्रवाई हुई होती, तो क्या आज यह नौबत आती?

