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ये कैसा मेंटेनेंस… ढाई की जगह 6 घंटे बिजली कट रही, पिछले 15 दिनों में विभिन्न इलाकों में 300 घंटे पावर कट

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  • What Kind Of Maintenance Is This… Power Cuts Lasting Six Hours Instead Of Two And A Half, With 300 Hours Of Power Cuts In Various Areas In The Last 15 Days.

रांची3 घंटे पहले

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राजधानी रांची में मेंटेनेंस और लाइन शिफ्टिंग के नाम पर की जा रही बिजली कटौती से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। शनिवार को नामकुम ग्रिड में 132 केवी मेन बस में मेंटेनेंस के नाम पर सुबह 5 बजे ही बिजली काट दी गई। इसके कारण इस ग्रिड से निकलने वाली 33 केवी फीडर चुटिया, कुसई, कोकर (अर्बन), टाटीसिल्वे, विकास, कोकर (रूरल), मेन रोड, खेलगांव, नामकुम और आरएमसीएच सबस्टेशन से विद्युत आपूर्ति बंद हो गई।

इससे आधे शहर की बिजली कट गई। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मोटर नहीं चल पाने के कारण सबसे पहले लोगों के घरों में पानी की दिक्कत हो गई। इससे लोगों की दिनचर्या ही गड़बड़ हो गई। यह वह समय होता है जब बच्चों को स्कूल जाना है, लोगों को ऑफिस के लिए निकलना होता है। शहर में गैस की किल्लत ने लोगों का ऐसे ही परेशान कर रखा है। गैस नहीं मिलने के कारण जिन घरों में इंडक्शन पर खाना बन रहा है, वहां खाना नहीं बन पाया। काफी इंतजार के बाद कहीं सुबह 9 बजे, कहीं सुबह 10 बजे, तो कहीं सुबह 11.45 बजे तक बिजली आई।

परेशानी तब और बढ़ गई, जब न्यू कैपिटल डिविजन के अंतर्गत न्यू मधुकम फीडर में मधुकम लायंस क्लब के पास यूजी केबल पंचर हो गया। इसके कारण बीती रात 1 बजे से बिजली संकट रहा। देर रात 1 बजे से ही लगातार अंतराल में बिजली का आना-जाना जारी रहा। पिछले 15 दिनों में मेंटेनेंस के नाम पर शहर के अलग-अलग इलाकों में 300 घंटे से अधिक समय तक बिजली काटी गई है।नामकुम ग्रिड बंद रहने के कारण मोबाइल टावर भी बंद हो गए। नामकुम, कोकर, कांटा टोली, मेन रोड, लालपुर, बरियातू, ओरमांझी, टाटीसिल्वे, हिंदपीढ़ी, चुटिया, कुसई व आसपास के क्षेत्रों में लगे मोबाइल टावर ने काम करना बंद कर दिया।

इसके कारण नेटवर्किंग की समस्या आई। मोबाइल पर नो नेटवर्क का मैसेज दिखता रहा। यूपीआई पेमेंट में भी लोगों को दिक्कतों का सामना क​रना पड़ा। जेबीवीएनएल द्वारा आरडीएसएस योजना के तहत बिजली वितरण प्रणाली में सुधार का कार्य तेजी से चल रहा है। इस योजना के अंतर्गत एलटी के खुले तारों को एरियल बंच केबल में बदलने, फीडर की दूरी कम करने तथा नए ट्रांसफार्मर स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों का जिम्मा एनसीसी को सौंपा गया है। एनसीसी द्वारा फरवरी महीने से ही नियमित रूप से शटडाउन लिया जा रहा है, जिसकी अवधि अलग-अलग स्थानों पर 2 घंटे से लेकर 6 घंटे तक रहती है।

फरवरी और मार्च के दौरान मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल होने के कारण लोगों ने किसी तरह इस असुविधा को सहन कर लिया। हालांकि, अप्रैल महीने में तापमान बढ़ने के साथ ही लोगों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि केवल पिछले 15 दिनों के भीतर शहर के विभिन्न इलाकों में कुल मिलाकर 300 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही है। लगातार हो रहे लंबे शटडाउन के कारण आम नागरिकों को भीषण गर्मी में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पंखे, कूलर और अन्य आवश्यक उपकरण बंद रहने से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। बिजली कटौती का असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी देखा जा रहा है। छोटे व्यवसायों और दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

लोग लगातार बिजली आपूर्ति बहाल करने और शटडाउन की अवधि को कम करने की मांग कर रहे हैं। साल 2018 के आसपास ओवरलोड चल रहे पहाड़ी फीडर को दो भागों में बांटा गया। न्यू मधुकम फीडर को अलग कर बिजली आपूर्ति शुरू की गई। इस दौरान आरपीडीआरपी स्कीम के तहत 11 केवी लाइन को अंडरग्राउंड केबल में बदला गया। कुछ सालों तक ठीक चलने के बाद यूजी केबल में समस्या उत्पन्न होने लगी। आए दिन इस फीडर के किसी न किसी क्षेत्र में यूजी केबल पंचर हो रहा है। जरा सी बारिश के बाद कहीं न कहीं कोई समस्या उत्पन्न हो रही है। अब इस यूजी केबल की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इसके कारण लोगों को अनचाहे पावर कट से जूझना पड़ रहा है।

नामकुम ग्रिड के मेन बस का काम बहुत जरूरी था। हाई लेबल बस होने के कारण और उसमें जंग लगने के कारण उसे खोल कर उतारने, ठीक करने में थोड़ा समय लग गया। मगर ग्रिड से पौने नौ बजे बिजली चालू कर दी गयी थी। उसके बाद हो सकता है कि वितरण डिवीजन के कारण समस्या आई होगी। – सुनील कुमार, सीनियर मैनेजर, ट्रांसमिशन निगम आरडीएसएस स्कीम के तहत लंबे शटडाउन के समय को कम किया जाएगा। यह कार्य जरूरी है। इस कार्य के होने के बाद शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा। रही बात अन्य समस्या की तो सभी ईई को निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए एक टाइम रोस्टर बनाएं, ताकि लोगों को सुबह दिक्कत न हो। वे न्यू मधुकम, पहाड़ी फीडर और रातू फीडर की समस्या का बहुत जल्द निरीक्षण करेंगे, जहां जरूरी हुआ, जो कमी सामने आई, उसे ठीक कराया जाएगा। – मनमोहन कुमार, जीएम, जेबीवीएनएल

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